जनसंख्या गतिशीलता: प्रवासन पैटर्न, जनसांख्यिकीय लाभांश एवं जलवायु-जनित विस्थापन

भारत की जनसंख्या संरचना गहरे परिवर्तन से गुजर रही है, जिसका कारण है बड़े पैमाने पर आंतरिक प्रवासन, कार्यशील आयु वर्ग का तीव्र विस्तार और पर्यावरणीय दबाव। ये परिवर्तन भविष्य की सामाजिक समानता, शहरी नियोजन और आर्थिक विकास की संभावनाओं को मूल रूप से आकार दे रहे हैं।

सरकारी पहल और परस्पर निर्भरता

प्रवासन पैटर्न

प्रमुख प्रवाह और कारण

आँकड़ा अंतर्दृष्टि (जनगणना 2011)

परिणाम/संबंध

सामाजिक-आर्थिक

ग्रामीण से शहरी/अर्ध-शहरी। प्रेरक कारण: गरीबी, स्थानीय रोजगार की कमी।

ग्रामीण-शहरी: 2.05 करोड़ लोग काम/रोजगार के उद्देश्य से स्थानांतरित हुए।

महानगरों का अति-शहरीकरण; झुग्गी-झोपड़ियों और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का विस्तार।

सामाजिक (विवाह)

मुख्यतः ग्रामीण-ग्रामीण; महिला प्रवासन का सबसे बड़ा हिस्सा।

लैंगिक विभाजन: विवाह ≈ ....

क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |

पूर्व सदस्य? लॉग इन करें


वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |

संबंधित सामग्री

प्रारंभिक विशेष