हीट वेव, शहरी जलवायु तनाव और अनुकूलन आधारित नियोजन
भारत में बढ़ती हीट वेव्स और शहरी जलवायु तनाव सार्वजनिक स्वास्थ्य, ऊर्जा मांग और शहरी जीवन की गुणवत्ता के लिए गंभीर खतरा हैं। इनसे निपटने के लिए अनुकूलन आधारित नियोजन (Adaptive Planning) आवश्यक है, जिसमें हीट एक्शन प्लान, शहरी हरित क्षेत्र, जलवायु-संवेदनशील भवन डिज़ाइन और भू-स्थानिक डेटा आधारित निगरानी शामिल हैं।
- शहरी जलवायु तनाव शहरों में वैश्विक तापन और शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव (Urban Heat Island Effect) के संयोजन से बढ़ता है।
- भारत अत्यधिक गर्मी के प्रति सबसे अधिक उजागर और सुभेद्य (vulnerable) देशों में से एक है।
हीट वेव्स के मापदंड
- भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) गंभीर मौसम घटनाओं की ....
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संबंधित सामग्री
- 1 भारत में क्षेत्रीय असमानताओं और स्थानिक विकास के पैटर्न
- 2 भारत की जनजातियाँ – FRA, PESA और पारिस्थितिक-सांस्कृतिक परिदृश्य
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- 4 जनसंख्या गतिशीलता: प्रवासन पैटर्न, जनसांख्यिकीय लाभांश एवं जलवायु-जनित विस्थापन
- 5 वायु गुणवत्ता प्रबंधन – राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) कार्यान्वयन
- 6 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन: नियम, चुनौतियाँ और समाधान
- 7 ठोस अपशिष्ट और लैंडफिल प्रबंधन
- 8 जलवायु-जनित आपदाएँ: अनुकूलन योजना और जलवायु वित्त का एकीकरण
- 9 सूखा: शुष्क क्षेत्र मानचित्रण एवं मरुस्थलीकरण नियंत्रण कार्यक्रम
- 10 चक्रवात: पूर्व चेतावनी प्रणाली और AI आधारित पूर्वानुमान
- 1 वैश्विक एवं क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य में भारत की रणनीतिक स्थिति
- 2 भारतीय उपमहाद्वीप का भू-गर्भिक विकास
- 3 प्रायद्वीपीय खंड, हिमालयीय क्षेत्र और सिंधु-गंगा मैदान
- 4 भारत के प्रमुख भू-आकृतिक प्रदेश और उनकी निर्माण प्रक्रियाएँ
- 5 भारत की तटीय एवं मरुस्थलीय भू-आकृतियाँ
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- 7 एकीकृत नदी बेसिन शासन: भूगोल एवं जल नीति का संगम
- 8 रिवर इंटरलिंकिंग
- 9 भूजल तनाव मानचित्रण
- 10 शहरी बाढ़ एवं अपवाह मानचित्रण
- 11 वॉटरशेड प्रबंधन एवं नदी पुनर्जीवन
- 12 नदी बेसिन विवाद: कावेरी, कृष्णा, महादयी और नीतिगत मध्यस्थता तंत्र
- 13 भूमिगत जल का दोहन एवं जलभृतों पर बढ़ता दबाव
- 14 भारतीय नदियों एवं डेल्टाओं पर जल-भूवैज्ञानिक प्रभाव
- 15 पड़ोसी देशों के साथ नदीय विवाद
- 16 भारत में प्रमुख मृदाएं
- 17 मृदा का क्षरण, अपरदन एवं संरक्षण तकनीकें
- 18 जैव विविधता हॉटस्पॉट एवं बायोस्फीयर रिज़र्व
- 19 सतत वन प्रबंधन
- 20 खनिज संसाधन: वितरण एवं प्रमुख उत्पादक क्षेत्र
- 21 औद्योगिक कॉरीडोर – DMIC, ईस्ट कोस्ट कॉरीडोर और गति शक्ति
- 22 लॉजिस्टिक्स और मल्टी-मोडल अवसंरचना
- 23 तटीय और ब्लू इकोनॉमी
- 24 बंदरगाह-आधारित विकास
- 25 कृषि संक्रमण – फसल विविधीकरण, कृषि-जलवायु क्षेत्रीयकरण, प्राकृतिक कृषि
- 26 पर्यटन और तीर्थ सर्किट
- 27 पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र एवं भूदृश्य-स्तरीय संरक्षण
- 28 मरुस्थलीकरण एवं भूमि निम्नीकरण
- 29 आर्द्रभूमि, रामसर स्थल एवं अंतर्देशीय जलीय रूपांतरण
- 30 शहरी ऊष्मा द्वीप और नगरीय सूक्ष्म जलवायु: जलवायु अनुकूलन योजना
- 31 वायु प्रदूषण का भूगोल: सिंधु-गंगा का मैदान, NCAP, GRAP और वाहन उत्सर्जन हॉटस्पॉट
- 32 मानसून परिवर्तनशीलता एवं ENSO-IOD प्रतिरूप
- 33 जेट स्ट्रीम और पश्चिमी विक्षोभ: बदलती प्रकृति और जलवायु प्रभाव
- 34 जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून व्यवहार में परिवर्तन
- 35 हिमनद निवर्तन, नदी प्रवाह में परिवर्तन तथा इसके प्रभाव
- 36 समुद्र स्तर वृद्धि, तटीय अपरदन एवं तटरेखा मानचित्रण
- 37 कार्बन सिंक, कार्बन बाज़ार, और भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना
- 38 जलवायु-स्मार्ट कृषि एवं भूमि-उपयोग संक्रमण
- 39 प्रकृति-आधारित समाधान एवं पारिस्थितिकी-आधारित अनुकूलन पहलें
- 40 बाढ़, सूखा एवं भूस्खलन के लिए आपदा जोखिम मानचित्रण
- 41 भूकम्प संभाव्यता क्षेत्र एवं तैयारी उपाय
- 42 चक्रवात: पूर्व चेतावनी प्रणाली और AI आधारित पूर्वानुमान
- 43 सूखा: शुष्क क्षेत्र मानचित्रण एवं मरुस्थलीकरण नियंत्रण कार्यक्रम
- 44 जलवायु-जनित आपदाएँ: अनुकूलन योजना और जलवायु वित्त का एकीकरण
- 45 ठोस अपशिष्ट और लैंडफिल प्रबंधन
- 46 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन: नियम, चुनौतियाँ और समाधान
- 47 वायु गुणवत्ता प्रबंधन – राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) कार्यान्वयन
- 48 जनसंख्या गतिशीलता: प्रवासन पैटर्न, जनसांख्यिकीय लाभांश एवं जलवायु-जनित विस्थापन
- 49 शहरीकरण की प्रवृत्तियाँ और सतत शहर
- 50 भारत की जनजातियाँ – FRA, PESA और पारिस्थितिक-सांस्कृतिक परिदृश्य
- 51 भारत में क्षेत्रीय असमानताओं और स्थानिक विकास के पैटर्न

