सूखा: शुष्क क्षेत्र मानचित्रण एवं मरुस्थलीकरण नियंत्रण कार्यक्रम
सूखा भारत की सबसे स्थायी प्राकृतिक आपदाओं में से एक है, जो देश के लगभग 68% भू-भाग को विभिन्न स्तरों पर प्रभावित करता है। इसी कारण शुष्क क्षेत्र मानचित्रण और मरुस्थलीकरण नियंत्रण कार्यक्रम भारत की पर्यावरणीय और कृषि नीतियों का केंद्रीय हिस्सा बन गए हैं। जलवायु परिवर्तनशीलता, अस्थिर भूमि उपयोग और भूजल क्षय ने सूखे के प्रभावों को और तीव्र बना दिया है। ऐसे में वैज्ञानिक मानचित्रण और पुनर्स्थापन कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं, ताकि आजीविका सुरक्षित रहे और पारिस्थितिक संतुलन बना रहे।
सूखा क्या है?
- सूखा एक लंबी अवधि तक वर्षा की कमी है, जो जल संकट और कृषि पर ....
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- 18 जैव विविधता हॉटस्पॉट एवं बायोस्फीयर रिज़र्व
- 19 सतत वन प्रबंधन
- 20 खनिज संसाधन: वितरण एवं प्रमुख उत्पादक क्षेत्र
- 21 औद्योगिक कॉरीडोर – DMIC, ईस्ट कोस्ट कॉरीडोर और गति शक्ति
- 22 लॉजिस्टिक्स और मल्टी-मोडल अवसंरचना
- 23 तटीय और ब्लू इकोनॉमी
- 24 बंदरगाह-आधारित विकास
- 25 कृषि संक्रमण – फसल विविधीकरण, कृषि-जलवायु क्षेत्रीयकरण, प्राकृतिक कृषि
- 26 पर्यटन और तीर्थ सर्किट
- 27 पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र एवं भूदृश्य-स्तरीय संरक्षण
- 28 मरुस्थलीकरण एवं भूमि निम्नीकरण
- 29 आर्द्रभूमि, रामसर स्थल एवं अंतर्देशीय जलीय रूपांतरण
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- 31 वायु प्रदूषण का भूगोल: सिंधु-गंगा का मैदान, NCAP, GRAP और वाहन उत्सर्जन हॉटस्पॉट
- 32 मानसून परिवर्तनशीलता एवं ENSO-IOD प्रतिरूप
- 33 जेट स्ट्रीम और पश्चिमी विक्षोभ: बदलती प्रकृति और जलवायु प्रभाव
- 34 जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून व्यवहार में परिवर्तन
- 35 हिमनद निवर्तन, नदी प्रवाह में परिवर्तन तथा इसके प्रभाव
- 36 समुद्र स्तर वृद्धि, तटीय अपरदन एवं तटरेखा मानचित्रण
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- 40 प्रकृति-आधारित समाधान एवं पारिस्थितिकी-आधारित अनुकूलन पहलें
- 41 बाढ़, सूखा एवं भूस्खलन के लिए आपदा जोखिम मानचित्रण
- 42 भूकम्प संभाव्यता क्षेत्र एवं तैयारी उपाय
- 43 चक्रवात: पूर्व चेतावनी प्रणाली और AI आधारित पूर्वानुमान
- 44 जलवायु-जनित आपदाएँ: अनुकूलन योजना और जलवायु वित्त का एकीकरण
- 45 ठोस अपशिष्ट और लैंडफिल प्रबंधन
- 46 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन: नियम, चुनौतियाँ और समाधान
- 47 वायु गुणवत्ता प्रबंधन – राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) कार्यान्वयन
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- 49 शहरीकरण की प्रवृत्तियाँ और सतत शहर
- 50 भारत की जनजातियाँ – FRA, PESA और पारिस्थितिक-सांस्कृतिक परिदृश्य
- 51 भारत में क्षेत्रीय असमानताओं और स्थानिक विकास के पैटर्न

