शहरीकरण की प्रवृत्तियाँ और सतत शहर
भारत एक तेज़ और स्थानिक रूप से असमान शहरी परिवर्तन से गुजर रहा है, जहाँ शहरी जनसंख्या वर्ष 2040 तक दोगुनी होने की संभावना है। यह महाप्रवृत्ति (Megatrend) आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन साथ ही यह अवसंरचना, संसाधनों की कमी और पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़ी गंभीर चुनौतियाँ भी प्रस्तुत करती है, विशेषकर शहरी भूगोल के संदर्भ में।
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शहरीकरण के पैटर्न और दबाव बिंदु |
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शहरी प्रवृत्ति / अवधारणा |
मुख्य विशेषताएँ और प्रवाह |
आँकड़े/मापदंड |
भौगोलिक निहितार्थ |
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शहरीकरण की गति |
लगभग 2.3% प्रति वर्ष की दर से वृद्धि; प्राकृतिक जनसंख्या वृद्धि और बड़े पैमाने पर ग्रामीण-शहरी प्रवासन द्वारा संचालित। |
शहरी जनसंख्या ≈ 35% .... | |
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