IMF की समीक्षा: राष्ट्रीय लेखा आंकड़ों में संरचनात्मक खामियां उजागर

  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की वार्षिक समीक्षा में भारत के राष्ट्रीय लेखा आंकड़ों (GDP, GVA आदि) को ‘C’ ग्रेड दिया गया है, जो दूसरा सबसे निचला स्तर है।
  • यह रेटिंग आर्थिक निगरानी और नीति-निर्माण में बाधक गंभीर खामियों को उजागर करती है, भले ही भारत की डेटा-संग्रह प्रणाली अपेक्षाकृत मजबूत हो।
  • वर्ष 2011–12 का पुराना आधार वर्ष इस समस्या का मूल कारण है, जिसका प्रयोग GDP, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में किया जाता है।
  • पुराना आधार वर्ष वृद्धि, मुद्रास्फीति और औद्योगिक गतिविधि के आकलन को विकृत करता है, जिससे RBI की मौद्रिक नीति प्रभावित होती है।
  • इसके अलावा, अनौपचारिक ....
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