रुपये का अवमूल्यन: क्या भारत को निर्यात में मिलेगी बढ़त?

?>

पिछले डेढ़ वर्ष में भारतीय रुपये में आई तेज गिरावट ने इसे अधिक मूल्यांकित (Overvalued) मुद्रा से अवमूल्यांकित (Undervalued) मुद्रा में बदल दिया है। अब कुछ संकेतकों के अनुसार रुपया चीनी युआन से भी अधिक प्रतिस्पर्धी हो गया है, जिससे भारत के निर्यात और विनिर्माण को संभावित लाभ मिल सकता है।

रुपये की हालिया स्थिति

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण रुपया 14 जुलाई को पहली बार ₹96 प्रति डॉलर के पार गया। 20 मई को यह ₹96.96 प्रति डॉलर के सर्वकालिक निम्न स्तर पर पहुँच गया था। बाद में ....

क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें

वार्षिक सदस्यता लें मात्र 600 में और पाएं...
पत्रिका की मासिक सामग्री, साथ ही पत्रिका में 2018 से अब तक प्रकाशित सामग्री।
प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा पर अध्ययन सामग्री, मॉक टेस्ट पेपर, हल प्रश्न-पत्र आदि।
क्रॉनिकल द्वारा प्रकाशित चुनिंदा पुस्तकों का ई-संस्करण।
पप्रारंभिक व मुख्य परीक्षा के चुनिंदा विषयों पर वीडियो क्लासेज़।
क्रॉनिकल द्वारा प्रकाशित पुस्तकों पर अतिरिक्त छूट।

नियमित स्तंभ