भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) की “मूनशॉट परियोजना”

  • 09 Mar 2026

4 मार्च, 2026 को भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु ने मस्तिष्क के कार्यों को बेहतर बनाने अथवा पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी “मूनशॉट परियोजना (Moonshot Project)” की शुरुआत की।

  • यह परियोजना प्रतीक्षा ट्रस्ट (Pratiksha Trust) द्वारा समर्थित (वित्तपोषित) है।
    • इस ट्रस्ट की स्थापना सेनापति ‘क्रिस’ गोपालकृष्णन तथा सुधा गोपालकृष्णन ने की है।

मुख्य बिंदु

  • इसका उद्देश्य न्यूरोमॉर्फिक हार्डवेयर तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता एल्गोरिद्म को संयोजित कर मस्तिष्क सह-प्रोसेसर (Brain Co-Processors) विकसित करना है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मस्तिष्क सह-प्रोसेसर मस्तिष्क से प्राप्त तंत्रिका संकेतों (Neural Signals) को डिकोड करेगी। तत्पश्चात इन संकेतों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता एल्गोरिद्म द्वारा संसाधित किया जाएगा।
  • इसके बाद संकेतों को तंत्रिका उत्तेजना (Neural Stimulation) या न्यूरोफीडबैक के माध्यम से पुनः मस्तिष्क में भेजा जाएगा।
  • इस तकनीक का उपयोग विशेष रूप से स्ट्रोक रोगी की पुनःसक्षमता (Stroke Rehabilitation) के लिए मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बढ़ाने या पुनर्स्थापित करने में किया जाएगा।
    • यह तकनीक स्ट्रोक से प्रभावित रोगियों में मोटर फंक्शन्स (Motor Functions) को पुनर्स्थापित करने में सहायता करेगी।
    • मोटर फंक्शन शरीर की वे गतिविधियाँ हैं, जिनमें मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियाँ मिलकर शरीर को हिलाने-डुलाने या कोई कार्य करने में मदद करती हैं।
  • इस तकनीकी के तहत शोधकर्ता दो प्रकार की प्रणालियाँ विकसित करेंगे:
    • गैर-आक्रामक तंत्रिका इंटरफेस (Non-invasive Neural Interfaces)
    • प्रत्यारोपण योग्य मस्तिष्क सह-प्रोसेसर (Implantable Brain Co-Processors)
  • क्लोज्ड-लूप ब्रेन प्रणाली: यह उपकरण तंत्रिका रिकॉर्डिंग (Neural Recording), कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित निष्कर्षण (AI-Driven Inference) तथा क्लोज्ड-लूप उद्दीपन (Closed-Loop Stimulation) के माध्यम से मस्तिष्क की समन्वित गतिविधि को पुनर्स्थापित करने का प्रयास करेगा।
  • स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास: इस परियोजना का उद्देश्य प्रतिरोपण (Implants), हार्डवेयर तथा एआई स्टैक (AI Stack) का स्वदेशीकरण करना है, ताकि वे भारत की चिकित्सीय अवसंरचना (Clinical Infrastructure) और सीमित संसाधन वाले स्वास्थ्य तंत्र (Low-Resource Settings) के अनुरूप विकसित किए जा सकें।