औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन एवं हरित विनिर्माण पहल

औद्योगिक डी-कार्बोनाइजेशन का अभिप्राय उच्च ऊर्जा-गहन एवं कार्बन-संवेदनशील उद्योग क्षेत्रों- जैसे इस्पात, सीमेंट और पेट्रोकेमिकल्स को जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता से मुक्त कर निम्न-कार्बन मार्गों की ओर स्थानांतरित करना है। इनमें ग्रीन हाइड्रोजन, कार्बन कैप्चर, तथा नवीकरणीय ऊर्जा-आधारित विद्युतीकरण प्रमुख साधन हैं।

  • यही रणनीति भारत की उस प्रतिबद्धता का मूल आधार है, जिसके तहत वह वर्ष 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की उत्सर्जन तीव्रता में 45% की कमी और वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो लक्ष्य प्राप्त करना चाहता है।

हितधारक एवं प्रभावित क्षेत्र

  • इस्पात एवं सीमेंट उत्पादक: ऊर्जा दक्षता और ईंधन परिवर्तन (कोयला से गैस/हाइड्रोजन) के प्राथमिक लक्ष्य।
  • MSMEs: प्रौद्योगिकी ....
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