औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन एवं हरित विनिर्माण पहल
औद्योगिक डी-कार्बोनाइजेशन का अभिप्राय उच्च ऊर्जा-गहन एवं कार्बन-संवेदनशील उद्योग क्षेत्रों- जैसे इस्पात, सीमेंट और पेट्रोकेमिकल्स को जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता से मुक्त कर निम्न-कार्बन मार्गों की ओर स्थानांतरित करना है। इनमें ग्रीन हाइड्रोजन, कार्बन कैप्चर, तथा नवीकरणीय ऊर्जा-आधारित विद्युतीकरण प्रमुख साधन हैं।
- यही रणनीति भारत की उस प्रतिबद्धता का मूल आधार है, जिसके तहत वह वर्ष 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की उत्सर्जन तीव्रता में 45% की कमी और वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो लक्ष्य प्राप्त करना चाहता है।
हितधारक एवं प्रभावित क्षेत्र
- इस्पात एवं सीमेंट उत्पादक: ऊर्जा दक्षता और ईंधन परिवर्तन (कोयला से गैस/हाइड्रोजन) के प्राथमिक लक्ष्य।
- MSMEs: प्रौद्योगिकी ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

