भारत में शहरी-ग्रामीण मानव विकास अंतराल
शहरी–ग्रामीण मानव विकास अंतराल से आशय शहरी और ग्रामीण आबादी के बीच स्वास्थ्य परिणामों, शैक्षिक उपलब्धियों तथा जीवन-स्तर में विद्यमान असमानताओं से है। इन अंतरों का आकलन जीवन प्रत्याशा, साक्षरता, विद्यालय नामांकन, बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच तथा आय स्तर जैसे संकेतकों के माध्यम से किया जाता है। भारत में समावेशी और संतुलित विकास की प्रगति को परखने के लिए ये अंतर अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
शहरी–ग्रामीण अंतराल: तथ्यात्मक परिदृश्य
- ग्रामीण भारत में बहुआयामी गरीबी का बोझ अब भी कहीं अधिक है, जहाँ 19.28% जनसंख्या बहुआयामी रूप से गरीब है, वहीं शहरी क्षेत्रों में यह अनुपात 5.27% है।
- उपभोग आधारित जीवन-स्तर में भी ....
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