कृषि ऋण अवसंरचना

कृषि ऋण संरचना से आशय उस संस्थागत ढाँचे और वित्तीय तंत्र से है, जिसके माध्यम से किसानों एवं संबद्ध क्षेत्रों को समय पर, सस्ता और पर्याप्त ऋण उपलब्ध कराया जाता है। यह ढाँचा भारत में कृषि उत्पादन, निवेश, जोखिम प्रबंधन तथा आय स्थिरता सुनिश्चित करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।

पृष्ठभूमि

  • 1969 के बैंक राष्ट्रीयकरण के बाद भारत ने कृषि ऋण के लिए बहु-एजेंसी दृष्टिकोण (Multi-Agency Approach)” अपनाया, जिसमें वाणिज्यिक बैंक, सहकारी संस्थाएँ और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक शामिल किए गए।
  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) की स्थापना 1975 में तथा नाबार्ड (NABARD) की स्थापना 1982 में की गई, जिससे कृषि एवं ग्रामीण ....

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