क्लस्टर विकास: पारंपरिक उद्योगों का पुनरुद्धार एवं MSME क्लस्टर्स
भारत में क्लस्टर विकास “साझा अवसंरचना” (Shared Infrastructure) मॉडल पर आधारित है, जिसका उद्देश्य बिखरे हुए उद्योगों के लिए विस्तारजनित लागत-लाभ (Economies of Scale) सृजित करना है। इसके अंतर्गत परस्पर संबद्ध इकाइयों का सह-अवस्थान (Agglomeration) किया जाता है, ताकि परीक्षण प्रयोगशालाओं, अपशिष्ट उपचार संयंत्रों और लॉजिस्टिक्स जैसी सामान्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इससे उत्पादन लागत में कमी आती है और “विखंडित उच्च-गुणवत्ता उत्पादन इकाइयों” को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से जोड़ा जा सकता है।
इन क्लस्टरों के प्रमुख घटक
- पारंपरिक कारीगर (Traditional Artisans): बुनकर, बाँस शिल्पकार और मधुमक्खी पालक, जिन्हें पारंपरिक उद्योगों के पुनरुद्धार के लिए निधि योजना (SFURTI) के ....
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