वैश्विक आपूर्ति शृंखला केंद्र के रूप में भारत

भारत स्वयं को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains – GVCs) में सहनशीलता के स्तंभ (Resilience Anchor) के रूप में स्थापित कर रहा है। मलक्का जलडमरूमध्य और स्वेज़ नहर के बीच अपनी रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाते हुए भारत का ध्यान लॉजिस्टिक्स लागत और टर्नअराउंड समय को कम करने पर है। इसका उद्देश्य चाइना प्लस वन” रणनीति के अंतर्गत एक व्यवहार्य विकल्प प्रस्तुत करना है। इसे मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और व्यापार सुगमता सुधारों का समर्थन प्राप्त है।

लॉजिस्टिक्स हितधारक एवं लाभार्थी

  • वैश्विक बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (Global MNCs): वैकल्पिक विनिर्माण आधार स्थापित कर रही हैं (जैसे Apple, Samsung, Micron)।
  • निर्यात-उन्मुख इकाइयाँ (EOUs): वस्त्र, फार्मा ....
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