गिग एवं प्लेटफ़ॉर्म अर्थव्यवस्था : श्रम प्रवृत्तियाँ और नियामक ढाँचा
गिग अर्थव्यवस्था पारंपरिक “नियोक्ता–कर्मचारी” संबंध से हटकर “कार्य-आधारित (Task-Based)” साझेदारी की ओर एक संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाती है, जहाँ कार्य का प्रबंधन एल्गोरिदम और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म द्वारा किया जाता है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं—लचीलापन, ऑन-डिमांड कार्य और रोजगार का अस्थायी स्वरूप।
- यह अर्थव्यवस्था मुख्यतः 2 वर्गों में विभाजित है—
- प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स (स्थान-निर्भर, जैसे डिलीवरी पार्टनर)
- नॉन-प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स (स्थान-स्वतंत्र, जैसे फ्रीलांसर)
प्रमुख वर्ग
- ब्लू-कॉलर गिग वर्कर्स: फूड/क्विक कॉमर्स डिलीवरी पार्टनर, राइड-हेलिंग ड्राइवर तथा घरेलू सेवा प्रदाता (जैसे Urban Company)।
- व्हाइट-कॉलर फ्रीलांसर: आईटी कंसल्टेंट, कंटेंट क्रिएटर, गिग-कोडर्स, जो वैश्विक ग्राहकों को सेवाएँ प्रदान करते हैं।
- एग्रीगेटर्स: स्विगी, ज़ोमैटो, उबर, ब्लिंकिट जैसे डिजिटल ....
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