भारत की राजकोषीय नीति
भारत में राजकोषीय नीति वर्तमान में एक संतुलित क्रमिक मार्ग पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य राजकोषीय एकीकरण को साधते हुए विकासोन्मुख पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) और समष्टि आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करना है। राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM Act) इस नीति का वैधानिक ढाँचा प्रदान करता है। अब इसका प्रमुख आधार कठोर वार्षिक राजकोषीय घाटे के आँकड़े से हटकर दीर्घकालिक वित्तीय स्वास्थ्य सुनिश्चित करने हेतु सतत ऋण-से-GDP अनुपात (Debt-to-GDP Ratio) पर स्थानांतरित हो गया है।
कौन सर्वाधिक प्रभावित?
- बॉन्ड बाज़ार एवं वित्तीय संस्थान: सरकारी उधारी में कमी से लाभान्वित, जिससे यील्ड कम और तरलता बेहतर हुई।
- सॉवरेन क्रेडिट ....
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