FDI/FPI प्रवृत्तियाँ एवं निवेश वातावरण में सुधार
भारत का निवेश वातावरण अब एक “रेड कार्पेट” व्यवस्था में बदल चुका है, जो पहले की जटिल नियामकीय भूलभुलैया से अलग है। इसने भारत को “चाइना प्लस वन” रणनीति के लिए पसंदीदा गंतव्य बना दिया है। ध्यान अब केवल निवेश की मात्रा (Gross Inflows) आकर्षित करने से हटकर उच्च-गुणवत्ता वाली पूँजी (Greenfield FDI) को उच्च-तकनीकी विनिर्माण में आकर्षित करने पर है। वहीं, FPI प्रवाह संरचनात्मक रूप से विस्तृत हुए हैं क्योंकि भारतीय बॉन्ड्स को वैश्विक सूचकांकों में शामिल किया गया है।
पूँजी प्राप्तकर्ता एवं बाज़ार प्रेरक
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