औषधि एवं चिकित्सीय उपकरण: नियामकीय सुधार और वैश्विक स्थिति

भारत की फार्मास्यूटिकल रणनीति अब केवल मात्रात्मक नेतृत्व” (जेनेरिक दवाएं) तक सीमित न रहकर मूल्य-आधारित नेतृत्व” (नवाचार एवं अनुसंधान–विकास) की ओर निर्णायक रूप से अग्रसर हो रही है। इसके समानांतर, चिकित्सीय उपकरण (Medical Devices) क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता की दिशा में संरचनात्मक परिवर्तन हो रहा है, जिसका उद्देश्य आयात-निर्भरता को घटाना है। इस परिवर्तन को एक सुदृढ़ और पुनर्गठित नियामक ढांचे का समर्थन प्राप्त है, जो मेडटेक को दवाओं से पृथक एक स्वतंत्र उद्योग के रूप में मान्यता देता है।

वैश्विक एवं घरेलू लाभार्थी

  • वैश्विक दक्षिण (Global South): वे राष्ट्र जो भारत पर सस्ती वैक्सीन और जेनेरिक दवाओं के लिए ....
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