औषधि एवं चिकित्सीय उपकरण: नियामकीय सुधार और वैश्विक स्थिति
भारत की फार्मास्यूटिकल रणनीति अब केवल “मात्रात्मक नेतृत्व” (जेनेरिक दवाएं) तक सीमित न रहकर “मूल्य-आधारित नेतृत्व” (नवाचार एवं अनुसंधान–विकास) की ओर निर्णायक रूप से अग्रसर हो रही है। इसके समानांतर, चिकित्सीय उपकरण (Medical Devices) क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता की दिशा में संरचनात्मक परिवर्तन हो रहा है, जिसका उद्देश्य आयात-निर्भरता को घटाना है। इस परिवर्तन को एक सुदृढ़ और पुनर्गठित नियामक ढांचे का समर्थन प्राप्त है, जो मेडटेक को दवाओं से पृथक एक स्वतंत्र उद्योग के रूप में मान्यता देता है।
वैश्विक एवं घरेलू लाभार्थी
- वैश्विक दक्षिण (Global South): वे राष्ट्र जो भारत पर सस्ती वैक्सीन और जेनेरिक दवाओं के लिए ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

