मेक इन इंडिया, PLI योजनाएँ एवं विनिर्माण क्षेत्र का पुनरुत्थान
‘मेक इन इंडिया 2.0’ पहल भारत को एक वैश्विक डिज़ाइन एवं विनिर्माण केंद्र में रूपांतरित करने हेतु एक अनुकूल पारिस्थितिक तंत्र का निर्माण कर रही है। इस रणनीति में आयात-प्रतिस्थापन से आगे बढ़कर निर्यात-आधारित विकास (Export-Led Growth) की ओर स्पष्ट बदलाव दिखाई देता है। इस परिवर्तन का प्रमुख आधार उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं हैं, जो वृद्धिशील बिक्री (Incremental Sales) पर वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान कर तथाकथित ‘डिसएबिलिटी कॉस्ट’ (उच्च लॉजिस्टिक लागत, स्केल की कमी, पूंजी लागत) की भरपाई करती हैं तथा घरेलू मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करती हैं।
औद्योगिक प्रेरक एवं लाभार्थी
- उदीयमान क्षेत्र (Sunrise Sectors): एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरियाँ, ....
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