जल संसाधन अवसंरचना : सिंचाई, बाँध एवं नदी जोड़ो परियोजनाएँ

भारत की जल अवसंरचना नीति अब केवल पृथक-पृथक जलाशयों के निर्माण तक सीमित न रहकर एक समग्र स्रोत-से-सेवा (Source-to-Service)” दृष्टिकोण में विकसित हो चुकी है। इसका मुख्य उद्देश्य नदी जोड़ो परियोजनाओं (ILR) के माध्यम से क्षेत्रीय सिंचाई असंतुलन को कम करना, DRIP द्वारा मौजूदा बाँधों की कार्यक्षमता एवं आयु बढ़ाना तथा पर ड्रॉप मोर क्रॉप” रणनीति के जरिए जल उपयोग दक्षता को अधिकतम करना है, ताकि दीर्घकालीन खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

प्रमुख लाभार्थी

  • सूखा-प्रवण क्षेत्र: बुंदेलखंड और मराठवाड़ा जैसे क्षेत्र अधिशेष जल के हस्तांतरण से लाभान्वित।
  • लघु एवं सीमांत किसान: ....

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