वित्तीय सेवाएँ एवं फिनटेक क्रांति
भारत के वित्तीय क्षेत्र में बीते दशक के दौरान एक मौलिक संरचनात्मक परिवर्तन देखने को मिला है। यह परिवर्तन अब केवल वित्तीय समावेशन (Access) तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वित्तीय सशक्तीकरण (Usage एवं Quality) की दिशा में अग्रसर हो चुका है।
- जनधन–आधार–मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी तथा इंडिया स्टैक पर आधारित यह पारिस्थितिक तंत्र आज बैंकिंग के “फिनटेक-आधारीकरण” से पहचाना जाता है, जिसने अंतिम छोर तक तत्काल डिजिटल भुगतान, नकदी-प्रवाह आधारित ऋण और किफायती बीमा सेवाओं को संभव बनाया है।
प्रमुख लाभार्थी
- ग्रामीण आबादी: प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) ढाँचे और आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) के प्रमुख लाभार्थी।
- MSME क्षेत्र: पारंपरिक ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

