रचनात्मक अर्थव्यवस्था
रचनात्मक अर्थव्यवस्था, जिसे प्रायः “ऑरेंज इकोनॉमी” कहा जाता है; संस्कृति, प्रौद्योगिकी और वाणिज्य के संगम से उभरता हुआ एक उच्च-विकासशील आर्थिक क्षेत्र बन चुकी है। यह अब केवल भारत की सॉफ्ट पावर तक सीमित न रहकर एक ठोस आर्थिक संपदा (Hard Economic Asset) में परिवर्तित हो गई है।
- इस परिवर्तन का प्रमुख आधार है “क्रिएटर इकोनॉमी” (इन्फ्लुएंसर, स्ट्रीमर आदि) तथा AVGC-XR क्षेत्र (एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी) जिसका फोकस अब सेवा-आउटसोर्सिंग से आगे बढ़कर बौद्धिक संपदा (IP) सृजन पर केंद्रित हो गया है।
लाभार्थी वर्ग
- गिग-इकोनॉमी क्रिएटर्स: यूट्यूबर्स, डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स और स्ट्रीमर्स, ....
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