बंदरगाह आधुनिकीकरण एवं सागरमाला : पोर्ट-आधारित औद्योगिक विकास
भारत की समुद्री रणनीति अब केवल “बंदरगाह विकास” तक सीमित न रहकर “पोर्ट-नेतृत्व वाले विकास (Port-Led Development)” की दिशा में निर्णायक रूप से अग्रसर हो चुकी है। सागरमाला कार्यक्रम के अंतर्गत, घरेलू एवं निर्यात-आयात (EXIM) कार्गो की लॉजिस्टिक्स लागत घटाने हेतु बंदरगाह अवसंरचना का आधुनिकीकरण, लैंडलॉर्ड पोर्ट मॉडल (जहाँ भूमि का स्वामित्व प्राधिकरण के पास तथा टर्मिनल संचालन निजी क्षेत्र द्वारा) को अपनाना तथा बंदरगाह-समीप तटीय आर्थिक क्षेत्रों (Coastal Economic Zones) का विकास किया जा रहा है।
प्रमुख लाभार्थी
- निर्यात-आयात व्यापार (EXIM): निर्यातक, कम टर्नअराउंड टाइम (TAT) और कम मालभाड़े लागत का लाभ उठा रहे हैं।
- तटीय समुदाय:
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