ग्रामीण अवसंरचना एवं आजीविका विविधीकरण
ग्रामीण अवसंरचना एवं आजीविका विविधीकरण का उद्देश्य भौतिक संपर्क, मूलभूत सेवाओं की उपलब्धता तथा कृषि के अलावा आय के अवसरों को सुदृढ़ करना है, ताकि भारत के गाँवों में समावेशी विकास, रोज़गार सृजन और जीवन-स्तर में समग्र सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
प्रभावित वर्ग
- ग्रामीण परिवार एवं लघु किसान।
- भूमिहीन श्रमिक एवं प्रवासी मज़दूर।
- महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्य।
- ग्रामीण युवा एवं कारीगर।
- ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय।
पृष्ठभूमि
- ऐतिहासिक रूप से ग्रामीण विकास की नीति आजीविका-सुरक्षा तक सीमित रही।
- वर्ष 2000 के बाद फोकस “कनेक्टिविटी” पर केंद्रित हुआ, विशेषकर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क ....
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