आरक्षण व्यवस्था और उप-वर्गीकरण
भारत में आरक्षण व्यवस्था को सामाजिक न्याय का साधन मानकर लागू किया गया था, ताकि ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके। किंतु समय के साथ यह स्पष्ट हुआ कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्गों के भीतर भी लाभ का वितरण असमान है।
- इस अंतर-वर्गीय असमानता को देखते हुए 1 अगस्त, 2024 को सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णय (7-न्यायाधीशीय पीठ, 6:1 बहुमत) में यह व्यवस्था दी कि राज्य सरकारें SC/ST वर्गों के भीतर उप-वर्गीकरण कर सकती हैं, ताकि आरक्षण का लाभ न्यायसंगत ढंग से वितरित हो सके।
- न्यायालय ने कहा कि यह ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

