पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्रः हालिया अधिसूचनाएँ और कानूनी संघर्ष
पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESZs) संरक्षित क्षेत्रों (जैसे राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य) के चारों ओर बनाए गए बफर जोन होते हैं, जिन्हें पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत अधिसूचित किया जाता है। इनका उद्देश्य मानवजनित दबावों को कम करना और सतत आजीविका को बढ़ावा देना है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के दिशा-निर्देश (2011) ESZs की सीमा 100 मीटर से 10 किलोमीटर तक निर्धारित करते हैं।
ESZ: मुख्य प्रावधान एवं सिद्धांत
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986: इसके तहत केंद्र सरकार विशेष क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए ESZs घोषित करती है।
- ESZs का उद्देश्यः ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

