जैव विविधता के लिए खतरे : आक्रामक प्रजातियाँ और कोरल ब्लीचिंग
जैव विविधता पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, आजीविका का आधार प्रदान करने और जलवायु नियमन में अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके बावजूद, यह बाह्य आक्रामक प्रजातियों और कोरल ब्लीचिंग जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। बाह्य आक्रामक प्रजातियाँ स्थानीय वनस्पति और जीवों को पछाड़कर पारिस्थितिक तंत्र को बाधित करती हैं, जबकि समुद्र के बढ़ते तापमान से कोरल ब्लीचिंग होती है, जिससे समुद्री जैव विविधता और तटीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुँचता है। भारत एक % मेगाडायवर्स% देश होने के कारण इन दोनों बढ़ते खतरों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है।
हालिया विकास
- जुलाई ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

