शक्तियों का पृथक्करण: हालिया विधायी और न्यायिक टकराव
शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत किसी भी लोकतंत्र की आधारशिला है, जो सरकारी सत्ता को तीन अलग-अलग शाखाओं में विभाजित करता है: विधायिका, जो कानून बनाती है; कार्यपालिका, जो उन्हें लागू करती है; और न्यायपालिका, जो उनकी व्याख्या करती है। हालाँकि भारतीय संविधान इस सिद्धांत को स्पष्ट रूप से संहिताबद्ध नहीं करता है, फिर भी यह इसके मूल ढांचे का एक अभिन्न अंग है।
हालिया घटनाक्रम
- राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) को लेकर विवाद।
- 2014 का 99वां संवैधानिक संशोधन उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम प्रणाली को बदलकर छह-सदस्यीय आयोग लाने का प्रयास था।
- आयोग में केंद्रीय कानून मंत्री ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

