न्यायपालिका में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): गति एवं निष्पक्षता हेतु तकनीक
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) वैश्विक स्तर पर न्याय-प्रणालियों को रूपांतरित कर रही है। भारत की न्यायपालिका भी इस तकनीक को तेजी से अपनाकर अपनी संरचनात्मक चुनौतियों का समाधान खोज रही है। AI का उद्देश्य न्यायाधीशों को प्रतिस्थापित करना नहीं, बल्कि उनकी क्षमता को बढ़ाना और न्याय वितरण प्रणाली को अधिक कुशल और निष्पक्ष बनाना है। न्यायपालिका में AI की भूमिका मुख्यतः दो स्तरों पर हैः (1) प्रशासनिक कार्यों का स्वचालन, ताकि कार्य की गति बढ़े तथा (2) डेटा-आधारित अंतर्दृष्टियाँ प्रदान करना, ताकि निर्णय प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ हो।
हालिया प्रगति
- न्यायालयों की दक्षता में सहायता के लिए सर्वोच्च न्यायालय पोर्टल ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

