पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन प्रणाली (SEEA)
पारंपरिक राष्ट्रीय लेखांकन जैसे सकल घरेलू उत्पाद (GDP) आर्थिक प्रदर्शन को मापते हैं, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों की क्षय और पारिस्थितिक तंत्र के ह्रास को नजरअंदाज कर देते हैं। इस कमी को दूर करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी प्रभाग (UNSD) ने पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन प्रणाली (System of Environmental-Economic Accounting – SEEA) विकसित की है, जो पर्यावरणीय आँकड़ों को आर्थिक लेखांकन से जोड़ने वाला एकीकृत सांख्यिकीय ढाँचा है।
हालिया प्रगति
- सितंबर 2024: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने EnviStats India का सातवाँ संस्करण SEEA रूपरेखा के अनुरूप जारी किया।
- पहली बार इसमें सागर पारिस्थितिक तंत्र का विवरण शामिल किया गया, जिसमें उनके ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

