पर्यावरणीय शासन को सुदृढ़ करने में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरणीय शासन को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। न्यायालय ने पूर्वव्यापी (Ex-Post Facto) पर्यावरणीय स्वीकृतियों पर रोक लगाई, प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को क्षतिपूर्ति हर्जाना वसूलने का अधिकार दिया और हैदराबाद के कांचा गाचीबोली क्षेत्र में अवैध वन-स्वीकृतियों पर रोक लगाई।
- इन निर्णयों ने भारत की पर्यावरणीय शासन-व्यवस्था को और मजबूत बनाया है।
हालिया निर्णय
- वनाशक्ति बनाम भारत संघ (मई 2025): न्यायालय ने घोषित किया कि पूर्वव्यापी पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ अवैध हैं, और सरकार की उन अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया, जिनमें निर्माण कार्य आरंभ हो जाने के बाद भी परियोजनाओं को ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

