सामयिक

विज्ञान-प्रौद्योगिकी:

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहला निजी स्पेसक्राफ्ट

23 फरवरी, 2024 को अमेरिका के ह्यूस्टन में स्थित निजी क्षेत्र की कंपनी ‘इंट्यूटिव मशीन्स’ का लैंडर ‘ओडिसियस’ चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर लैंड हो गया। इसे 15 फरवरी, 2024 को लॉन्च किया गया था।

  • ओडिसियस, चन्द्रमा पर लैंडिंग करने वाला किसी प्राइवेट कंपनी का पहला स्पेसक्राफ्ट बन गया है।
  • अमेरिका दूसरा देश है, जो चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरा है।
  • इससे पहले 23 अगस्त, 2023 को भारत के चंद्रयान-3 की साउथ पोल पर सफल लैंडिंग हुई थी।
  • लैंडिंग से पहले ओडिसियस के नेविगेशन सिस्टम में कुछ खराबी आई थी, जिसके बावजूद लैंडिंग कराई गई।
  • ओडिसियस मून मिशन का लक्ष्य चंद्रमा पर मौजूद धूल का अध्ययन करना है।
  • ओडिसियस जिस जगह पर लैंड हुआ है, उसे मालापर्ट के नाम से जाना जाता है, यहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती।

कोरोनल मास इजेक्शन के प्रभाव का अवलोकन

23 फरवरी, 2024 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा जानकारी दी गई कि आदित्य-एल1 के साथ भेजे गए प्लाज्मा एनालाइजर पैकेज फॉर आदित्य (PAPA) पेलोड ने कोरोनल मास इजेक्शन (CME) के प्रभाव का पता लगाया है।

  • प्लाज्मा एनालाइजर पैकेज फॉर आदित्य (PAPA) एक ऊर्जा और द्रव्यमान विश्लेषक है, जिसे निम्न ऊर्जा सीमा (Low Energy Range) में सौर पवन इलेक्ट्रॉनों और आयनों के इन-सीटू माप (In-situ measurements) के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • इसमें दो सेंसर हैं: सौर पवन इलेक्ट्रॉन ऊर्जा जांच (Solar Wind Electron Energy Probe: SWEEP) और सौर पवन आयन संरचना विश्लेषक (Solar Wind Ion Composition Analyser: SWICAR)।
  • इसरो के बयान में कहा गया है कि PAPA पेलोड द्वारा दी गई जानकारियां अंतरिक्ष मौसम की स्थिति की निगरानी में इसकी प्रभावशीलता और सौर परिघटनाओं का पता लगाने एवं विश्लेषण करने की क्षमता पर जोर देती हैं।
  • आदित्य-एल1 को 2 सितंबर, 2023 को इसरो द्वारा पीएसएलवी-सी57 रॉकेट द्वारा सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था।
  • oआदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान के साथ सूर्य का अध्ययन करने के लिए 7 पेलोड भेजे गए हैं। इनमें से 4 सूर्य से प्रकाश का निरीक्षण करने तथा अन्य तीन प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र के इन-सीटू मापदंडों को मापने के लिए निर्देशित हैं।
  • PAPA पेलोड को विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) की अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला और एवियोनिक्स इकाई द्वारा विकसित किया गया था।

कोरोनल मास इजेक्शन (CME) क्या है?

  • कोरोनल मास इजेक्शन की खोज वर्ष 1971 में की गई थी तथा बाद में 1980 के दशक में सौर-पार्थिव संबंधों (Solar Terrestrial Relationship) के संदर्भ में इसके महत्व का पता लगाया गया।
  • CME में सौर प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के विशाल बादल शामिल होते हैं।
  • इसकी उत्पत्ति आम तौर पर सौर ज्वालाओं और फिलामेंट विस्फोटों (Solar Flares and Filament Eruptions) के साथ होती है।
  • CME की आवृत्ति 11 वर्ष के सौर चक्र के साथ परिवर्तित होती रहती है। सौर न्यूनतम (Solar Minimum) की दशा में प्रति सप्ताह लगभग एक और सौर अधिकतम (Solar Maximum) के समय प्रति दिन औसतन दो से तीन CME परिघटनाएं देखी जाती हैं।
  • कोरोनल मास इजेक्शन के कारण भू-चुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storms), अरोरा (Aurorae) और चरम मामलों में विद्युत पॉवर ग्रिड को नुकसान तक पहुंच सकता है।
    • सभी कोरोनल मास इजेक्शन पृथ्वी के साथ संपर्क नहीं करते हैं, लेकिन जो पृथ्वी को प्रभावित करते हैं, वे उपग्रह संचार और पॉवर ग्रिड में व्यवधान उत्पन्न कर सकते हैं।

इनसैट-3DS उपग्रह प्रक्षेपित

17 फरवरी, 2024 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा जीएसएलवी-F14 प्रक्षेपण यान के जरिये इनसैट-3DS उपग्रह को प्रक्षेपित किया गया।

  • यह जीएसएलवी-F14 की 16वीं और स्वदेशी क्रायो स्टेज के साथ प्रक्षेपण यान की 10वीं उड़ान थी।
  • इनसैट-3DS की मदद से प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा।
  • इस सैटेलाइट का वजन 2274 किलोग्राम है और इसका उपयोग पृथ्वी विज्ञान, मौसम विज्ञान, खोज एवं बचाव तथा महासागरीय प्रौद्योगिकी (Ocean Technology) के लिए किया जाएगा।
  • इसका उपयोग बादल, कोहरे, वर्षा, बर्फ, आग, धुआं, भूमि और समुद्रों की गहराई के शोध के लिए भी किया जाएगा।
  • इनसैट-3DS सैटेलाइट के माध्यम से मौसम से जुड़ी जानकारी हासिल करने और भूमि संरक्षण के क्षेत्र में सुधार करने में भी मदद होगी।
  • वर्तमान में मौसम संबंधी उपग्रह INSAT-3D और INSAT-3DR की सहायता से मौसम की जानकारी प्राप्त की जाती है।
  • INSAT-3D को 26 जुलाई, 2013 को और INSAT-3DR को 8 सितंबर, 2016 को प्रक्षेपित किया गया था।

‘शक्ति’ युद्धक प्रणालियों की खरीद हेतु समझौता

रक्षा मंत्रालय ने 11 'शक्ति' युद्धक प्रणालियों और उससे संबंधित उपकरणों की खरीद के लिए 13 फरवरी, 2024 को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ 2,269 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर किये।

  • इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली ‘शक्ति’ भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर स्थापित की जाएगी। यह प्रणाली स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित है।
  • शक्ति प्रणालियां इलेक्ट्रॉनिक संचार को सटीक रूप से पकड़ने और सघन विद्युत चुम्बकीय परिवेश में प्रतिरोधी कदम उठाने में सक्षम हैं।
  • यह परियोजना एमएसएमई सहित 155 से अधिक उद्योग साझेदारों के साथ 4 वर्षों में 2.5 लाख मानव दिवसों के रोजगार का सृजन करेगी।

स्वाति पोर्टल का शुभारंभ

विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार ने 11 फरवरी, 2024 को भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी में स्वाति पोर्टल लॉन्च किया।

  • स्वाति पोर्टल से तात्पर्य साइंस फॉर वुमेन - ए टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन’ से है।
  • स्वाति पोर्टल को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित एवं चिकित्सा (STEMM) क्षेत्र में महिलाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया।
  • ‘महिलाओं के लिए विज्ञान- एक प्रौद्योगिकी एवं नवाचार’ (स्वाति) पोर्टल एक संपूर्ण इंटरैक्टिव डेटाबेस है तथा यह भारत में अपनी तरह का पहला पोर्टल है।
  • इसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट जीनोम रिसर्च (NIPGR) द्वारा विकसित किया गया है; इसी संस्थान द्वारा इसका रखरखाव भी किया जाता है।

सी-डॉट एवं आईआईटी रुड़की के मध्य समझौता

'सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स' (C-DOT) तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की (IIT-R) ने "6जी एवं उससे आगे की प्रौद्योगिकियों हेतु 140 गीगाहर्ट्ज के पूरी तरह से एकीकृत ट्रांसमीटर और रिसीवर मॉड्यूल विकसित करने" के लिए हाल ही में एक समझौते पर हस्ताक्षर किये।

  • इस परियोजना के सफल समापन से अगली पीढ़ी के अल्ट्रा-फास्ट, कम-विलंबता वाले 6जी नेटवर्क के विकास में योगदान मिलेगा, जो विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन में योगदान देगा।
  • यह समझौता दूरसंचार विभाग (DoT) की दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास निधि (TTDF) योजना के तहत हस्ताक्षरित किया गया है।
  • दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास निधि (TTDF) योजना का उद्देश्य दूरसंचार उत्पादों और समाधानों के प्रौद्योगिकी डिजाइन, विकास, व्यावसायीकरण में शामिल घरेलू कंपनियों और संस्थानों को ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों में किफायती ब्रॉडबैंड और मोबाइल सेवाएं प्रदान करने में मदद करना है।
  • उल्लेखनीय है कि सी-डॉट, भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) का एक प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास केंद्र है।

TOI-715 b नामक ग्रह की खोज

नासा के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से 137 प्रकाश वर्ष दूर स्थित ‘टीओआई-715 बी’ (TOI-715 b) नामक ग्रह की खोज की है। वैज्ञानिकों द्वारा इसे 'सुपर अर्थ' कहा जा रहा है।

  • यह ग्रह एक लाल तारे की परिक्रमा कर रहा है।
  • TOI-715 b ‘रहने योग्य क्षेत्र’ (Habitable Zone) के भीतर अपने मूल तारे के चारों ओर परिक्रमा कर रहा है।
  • पृथ्वी से 1.5 गुना आकार वाला यह ग्रह संभावित रूप से तरल पानी के लिए अनुकूल है।
  • जेम्स वेब टेलीस्कोप का उपयोग करके, ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) द्वारा की गई यह खोज भविष्य में अंतरिक्ष अनुसंधान के अवसर प्रदान करेगी।
  • ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) एक अंतरिक्ष दूरबीन है, जो नासा के एक्सप्लोरर कार्यक्रम का हिस्सा है।
  • जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) एक टेलीस्कोप है, जो अवरक्त प्रकाश का अवलोकन करती है।
  • यह अमेरिकी राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष प्रशासन (NASA), कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के मध्य एक सहयोगात्मक परियोजना है।

आईएनएस संधायक (यार्ड 3025) भारतीय नौसेना में शामिल

3 फरवरी, 2024 को नौसेना डॉकयार्ड, विशाखापत्तनम में आईएनएस संधायक (यार्ड 3025) को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। यह देश का पहला और सबसे बड़ा सर्वे पोत है।

  • जहाज की प्राथमिक भूमिका सुरक्षित समुद्री नौवहन को सक्षम करने की दिशा में बंदरगाहों, नौवहन चैनलों/मार्गों, तटीय क्षेत्रों और गहरे समुद्रों का पूर्ण पैमाने पर जलमाप चित्रण संबधी जलीय सर्वेक्षण करना है।
  • इसके अलावा यह जहाज कई प्रकार के नौसैनिक अभियानों में भी अहम भूमिका निभाने में सक्षम है।
  • आईएनएस संधायक महासागरों के बारे में जानकारी प्राप्त करने और देश के साथ-साथ अन्य देशों की रक्षा करने के दोहरे उद्देश्य को प्राप्त करने में सहयोगी होगा।
  • आईएनएस संधायक के नौसेना में शामिल होने से आत्मनिर्भरता के साथ भारतीय नौसेना को समुद्री आंकड़ों के विश्लेषण में सहायता मिलेगी।
  • भारतीय नौसेना के अनुसार, कोलकाता के मैसर्स गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स में 4 बड़े सर्वेक्षण पोत निर्माणाधीन हैं। आइएनएस संधायक उनमें प्रथम है।
  • इस परियोजना का संचालन भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा किया गया है।
  • जहाज की आधारशिला 12 मार्च, 2019 को रखी गई थी और जहाज को 5 दिसंबर, 2021 को जलावतरित किया गया था।
  • जहाज का विस्थापन 3,400 टन और कुल लंबाई 110 मीटर है।

स्वदेशी ग्रीन प्रोपल्शन सिस्टम

रक्षा मंत्रालय ने 1 फरवरी, 2024 को बताया कि स्वदेशी रूप से विकसित ग्रीन प्रोपल्शन सिस्टम ने निर्धारित कक्षा (ऑर्बिट) में अपनी कार्यक्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है।

  • इसे पीएसएलवी सी-58 से एक पेलोड पर लॉन्च किया गया था।
  • ग्रीन प्रोपल्शन सिस्टम को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की प्रौद्योगिकी विकास निधि (TDF) योजना के तहत विकसित किया गया है।
  • ‘1N क्लास ग्रीन मोनोप्रोपेलेंट थ्रस्टर' नामक तकनीक वाली इस परियोजना के लिए बेंगलुरु स्थित स्टार्ट-अप बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड को मंजूरी दी गई थी।
  • इस नई तकनीक के चलते लो ऑर्बिट स्पेस के लिए नॉन-टॉक्सिक और पर्यावरण-फ्रेंडली प्रोपल्शन सिस्टम विकसित हो सका है।
  • इस प्रणाली में स्वदेशी रूप से विकसित प्रोपेलेंट, फिल और ड्रेन वाल्व, लैच वाल्व, सोलेनॉइड वाल्व, कैटलिस्ट बेड, ड्राइव इलेक्ट्रॉनिक्स आदि शामिल हैं।

आकाश-एनजी (AKASH-NG) मिसाइल का सफल परीक्षण

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 12 जनवरी, 2024 को ओडिशा के तट पर चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से नई पीढ़ी की आकाश-एनजी (AKASH-NG) मिसाइल का सफल परीक्षण किया।

  • यह परीक्षण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा अत्यधिक कम ऊंचाई पर उच्च गति वाले मानवरहित हवाई लक्ष्य को निशाना बनाकर किया गया।
  • आकाश नई पीढ़ी की 'सतह से हवा' (Surface-to-Air) में मार करने वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली है।
  • उड़ान-परीक्षण के दौरान, हथियार प्रणाली द्वारा लक्ष्य को सफलतापूर्वक रोका गया और नष्ट कर दिया गया।
  • इस परीक्षण में स्वदेशी रूप से विकसित रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर, लॉन्चर, मल्टी-फंक्शन रडार तथा कमांड, नियंत्रण एवं संचार प्रणाली के साथ मिसाइल से युक्त संपूर्ण हथियार प्रणाली की क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया।
  • आकाश-एनजी प्रणाली एक अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली है, जो त्वरित गति से आने वाले हवाई लक्ष्यों को रोकने में सक्षम है।
  • इस सफल उड़ान परीक्षण ने अब अस्त्र प्रणाली के उपयोग के लिए परीक्षणों का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
  • 3087 किमी. प्रति घंटा की गति वाली इस मिसाइल की रेंज लगभग 80 किलोमीटर है। इस मिसाइल को मोबाइल लॉन्चर सिस्टम से भी दागा जा सकता है।
  • 720 किलोग्राम वजन वाली इस मिसाइल की लंबाई 19 फीट है, जो 60 किलोग्राम वजन ले जाने में सक्षम है।
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