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सामयिक

पर्यावरण:

प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जागरूकता शुभंकर 'प्रकृति' और हरित पहल

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने 5 अप्रैल, 2022 को प्रभावी प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जागरूकता शुभंकर 'प्रकृति' और हरित पहल को लॉन्च किया।

महत्वपूर्ण तथ्य: भारत सालाना लगभग 3.5 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा पैदा कर रहा है और प्रति व्यक्ति प्लास्टिक कचरा उत्पादन पिछले पांच वर्षों में लगभग दोगुना हो गया है।


आरोग्य वनम

भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 1 मार्च, 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में राष्ट्रपति प्रांगण में एक नव विकसित 'आरोग्य वनम' (AROGYA VANAM) का उद्घाटन किया।

महत्वपूर्ण तथ्य: 6.6 एकड़ क्षेत्र में फैले आरोग्य वनम को योग मुद्रा में बैठे किसी मनुष्य के आकार में विकसित किया गया है।


न्यून कार्बन प्रौद्योगिकी परिनियोजन सुविधा

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) ने 1 मार्च, 2022 को न्यून कार्बन प्रौद्योगिकियों पर राष्ट्रीय नवाचार सम्मेलन का आयोजन करके अपना 20वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर न्यून कार्बन प्रौद्योगिकी परिनियोजन सुविधा (Facility for Low Carbon Technology Deployment: FLCTD) उत्प्रेरकों का एक संग्रह जारी किया गया।

  • महत्वपूर्ण तथ्य: FLCTD परियोजना का शुभारंभ 2016 में किया गया था, जिसका उद्देश्य नवीन ऊर्जा दक्षता और न्यून कार्बन प्रौद्योगिकी समाधानों की पहचान करना है, जो भारतीय औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में मौजूदा प्रौद्योगिकी अंतराल को समाप्त करते हैं।

गधों की हलारी नस्ल

केन्द्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री परषोत्तम रूपाला ने 12 मार्च, 2022 को ‘सौराष्ट्र मालधारी सम्मेलन’ को संबोधित किया। इस सम्मेलन में पशुधन की संकटापन्न नस्लों, विशेष रूप से 'गधों की हलारी नस्ल' (Halari breed of Donkey) के संरक्षण पर विचार-विमर्श किया गया।

सम्मेलन का विषय: 'सौराष्ट्र में पशुपालन को प्रोत्साहन- संरक्षण एवं निर्वहन' (Fostering Pastoralism in Saurashtra- Conservation and its Sustenance)।


प्लास्टिक पैकेजिंग पर विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व पर दिशा- निर्देश

पर्यावरण मंत्रालय ने 18 फरवरी, 2022 को प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत प्लास्टिक पैकेजिंग पर ‘विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व’ (Extended Producers Responsibility: EPR) पर दिशा-निर्देशों को अधिसूचित किया।

महत्वपूर्ण तथ्य: विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व सम्बंधी दिशा-निर्देशों को सिंगल यूज प्लास्टिक से बनी चीजों पर पाबंदियों के साथ जोड़ा गया है, जो 1 जुलाई 2022 से प्रभावी होगा।


भारत में अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र को सुदृढ़ बनाना

केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने 6 दिसंबर, 2021 को 'स्वच्छ भारत मिशन - शहरी 2.0' (SBM-U 2.0) के समग्र दायरे के तहत भारत में अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए 'यूएनडीपी इंडिया' के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।


कोयला मंत्रालय की सतत विकास पहल

कोयला मंत्रालय प्रतिबद्धता के अनुरूप अब व्यापक सतत विकास योजना के साथ पहले ही आगे बढ़ चुका है।

महत्वपूर्ण तथ्य: खनन के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए सलाह, परामर्श और योजना कार्रवाई हेतु कोयला मंत्रालय में एक पूर्ण विकसित ‘सतत विकास प्रकोष्ठ’ (SDC) की स्थापना की गई है।


कॉप-26 शिखर सम्मेलन में भारत

जलवायु परिवर्तन पर कॉप-26 शिखर सम्मेलन के दौरान 1 नवंबर, 2021 को भारत की ओर से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए पांच प्रतिज्ञायें की, जिसे उन्होंने 'पंचामृत' की संज्ञा दी।

  • पहला: भारत 2030 तक अपनी गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 500 गीगावॉट तक पहुंचाएगा।

प्रकृति और लोगों के लिए उच्च आकांक्षा गठबंधन

7 अक्टूबर, 2021 को नई दिल्ली में फ्रांसीसी और भारतीय सरकारों के बीच आयोजित एक समारोह में, भारत आधिकारिक तौर पर 'प्रकृति और लोगों के लिए उच्च आकांक्षा गठबंधन' (High Ambition Coalition for Nature and People) में शामिल हो गया है।

महत्वपूर्ण तथ्य: यह गठबंधन 70 से अधिक देशों का एक समूह है, जो ‘30x30 की रक्षा के लिए वैश्विक लक्ष्य’ (global goal to protect 30x30) को अपनाने के लिये प्रोत्साहित कर रहा है।


धूल नियंत्रण एवं प्रबंधन प्रकोष्ठ

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों के लिए गठित वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा 5 अक्टूबर, 2021 को उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा की राज्य सरकारों और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार की सड़कों के स्वामित्व / रखरखाव / निर्माण से जुड़ी सभी एजेंसियों को अपने-अपने राज्यों में धूल नियंत्रण एवं प्रबंधन प्रकोष्ठ स्थापित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य: यह प्रकोष्ठ संबंधित प्राधिकरणों द्वारा सड़कों पर धूल नियंत्रण के उपायों के अनुपालन की नियमित रूप से निगरानी करेगा।


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