पीआईबी न्यूज राष्ट्रीय

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत एम्स


प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के तहत कई नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) स्थापित किए जा रहे हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य: इस योजना के तहत अब तक 22 नए एम्स की स्थापना को मंजूरी दी गई है, जिनमें से भोपाल, भुवनेश्वर, जोधपुर, पटना, रायपुर और ऋषिकेश में छ: एम्स पहले से ही पूरी तरह से काम कर रहे हैं।

  • अन्य सात एम्स में ओपीडी की सुविधा और एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू हो गई हैं, जबकि पांच अन्य संस्थानों में केवल एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू हुई हैं।
  • PMSSY के तहत स्थापित या स्थापित किए जा रहे इन क्षेत्रीय एम्स ने पिछले साल की शुरुआत में महामारी की शुरुआत से ही कोविड के प्रबंधन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • अगस्त 2003 में तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल वाली सुविधाओं (अस्पतालों) की उपलब्धता में असंतुलन को दूर करने और देश में चिकित्सा शिक्षा में सुधार के लिए एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना ‘प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’ की घोषणा की गई थी।

पीआईबी न्यूज आर्थिक

घोलवड सपोटा ‘चीकू’


भौगोलिक संकेत (जीआई) प्रमाणित उत्पादों के निर्यात को प्रमुखता से बढ़ावा देने के लिए, महाराष्ट्र के पालघर जिले से ‘दहानु घोलवड सपोटा’ (चीकू) (Dahanu Gholvad Sapota) की एक खेप को 19 मई, 2021 को यूनाइटेड किंगडम भेजा गया।

महत्वपूर्ण तथ्य: घोलवड सपोटा का जीआई प्रमाणीकरण ‘महाराष्ट्र राज्य चीकू उत्पादक संघ’ के पास है और यह फल अपने ‘मीठे और बेहतरीन स्वाद’ के लिए जाना जाता है।

  • ऐसा माना जाता है कि ‘घोलवड गांव’ की ‘कैल्शियम समृद्ध मिट्टी’ से इसमें अद्वितीय स्वाद उत्पन्न होता है।
  • वर्तमान में पालघर जिले में लगभग 5000 हेक्टेयर भूमि में सपोटा या वृक्षारोपण किया जाता है।
  • सपोटा को कई राज्यों- कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में उगाया जाता है। ‘कर्नाटक’ को इस फल का सबसे अधिक उत्पादक माना जाता है, इसके बाद महाराष्ट्र में उगाया जाता है।
  • इसका उपयोग फलों के सलाद में, दूध या दही में मिश्रित करके, चटनी के रूप में अथवा जैम बनाने के रूप में किया जा सकता है।
  • इस महीने की शुरुआत में, आंध्र प्रदेश के कृष्णा और चित्तूर जिलों के किसानों से प्राप्त 2.5 मीट्रिक टन जीआई प्रमाणित ‘बंगनपल्ली’ (Banganapalli) और ‘सुरवर्णरेखा’ (Survarnarekha) आम की एक खेप दक्षिण कोरिया को निर्यात की गई थी।

पीआईबी न्यूज विज्ञान-प्रौद्योगिकी

फेकबस्टर


मई 2021 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रोपड़, और मॉनाश यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया के अनुसंधानकर्ताओं ने ‘फेकबस्टर’ (FakeBuster) नामक एक ऐसा अनोखा डिटेक्टर (unique detector) विकसित किया है, जो ऐसे किसी भी ऑनलाइन फरेबी का पता लगा सकता है, जो बिना किसी जानकारी के वर्चुअल सम्मेलन में घुसपैठ कर जाते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य: मौजूदा महामारी के दौर में ज्यादातर कामकाज और आधिकारिक बैठकें ऑनलाइन हो रही हैं। इस अनोखी तकनीक से यह पता लगाया जा सकता है कि किस व्यक्ति के वीडियो के साथ छेड़-छाड़ की जा रही है या वीडियों कॉन्फ्रेंस के दौरान कौन घुसपैठ कर रहा है।

  • फेकबस्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग परिदृश्यों के लिए एक ‘डीपफेक्स’ (DeepFakes) डिटेक्शन टूल या उपकरण है।
  • वीडियो या विजुअल हेरफेर करने को ही ‘डीपफेक्स’ के नाम से जाना जाता है। ऑनलाइन परीक्षा या नौकरी के लिये होने वाले साक्षात्कार के दौरान भी इसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • फेकबस्टर सॉफ्टवेयर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सॉल्यूशन से अलग है और इसे ‘जूम’ (Zoom) और ‘स्काइप’ (Skype) एप्लिकेशन पर परखा जा चुका है।
  • फेक-बस्टर ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों तरीके से काम करता है। इसे मौजूदा समय में लैपटॉप और डेस्कटॉप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

सामयिक खबरें आर्थिकी

सीमा शुल्क (रियायती शुल्क दर पर वस्तुओं का आयात) संशोधन नियम, 2021


सरकार व्यापार सुविधा को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा सीमा शुल्क (रियायती शुल्क दर पर वस्तुओं का आयात) नियम, 2017 (IGCR 2017) में बदलाव लेकर आई है। 18 मई, 2021 को 'केंद्रीय सीमा शुल्क और अप्रत्यक्ष कर बोर्ड' (CBIC) ने सीमा शुल्क (रियायती शुल्क दर पर वस्तुओं का आयात) संशोधन नियम, 2021 के माध्यम से बदलाव पेश किए हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य: IGCR 2017 के तहत उन प्रक्रियाओं और तरीके को निर्धारित किया जाता है, जिसके अनुसार एक आयातक वस्तुओं के घरेलू उत्पादन या सेवाएं प्रदान करने के लिए आवश्यक वस्तुओं के आयात पर रियायती सीमा शुल्क का लाभ उठा सकता है।

  • व्यापार और उद्योग जगत की जरूरतों को समायोजित करने के लिए आयातित वस्तुओं को ‘जॉब वर्क’ के लिए बाहर भेजने की अनुमति दे दी गई है। पहले यह सुविधा न मिलने से उद्योग जगत, विशेषकर एमएसएमई क्षेत्र के उन उद्यमों को काफी मुश्किलें होती थीं, जिनके पास आंतरिक रूप से पूर्ण विनिर्माण क्षमता नहीं थी।
  • ऐसे आयातक जिनके पास कोई विनिर्माण सुविधा नहीं है, वे भी अब रियायती सीमा शुल्क पर वस्तुओं का आयात करने के लिए आईजीसीआर, 2017 का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, कुछ सेक्टरों जैसे कि सोना, आभूषण, बेशकीमती पत्थरों और धातुओं को इससे बाहर रखा गया है।
  • अब एक और प्रमुख प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिसके तहत रियायती सीमा शुल्क पर पूंजीगत सामान का आयात करने वालों को अब उन्हें मूल्यह्रास वाली कीमतों पर शुल्क और ब्याज के भुगतान पर घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति दे दी गई है। पहले इसकी अनुमति नहीं थी।

सामयिक खबरें राष्ट्रीय

दिव्यांगजन पुनर्वास पर समुदाय आधारित समावेशी विकास कार्यक्रम


केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. थावरचन्द गहलोत ने 19 मई, 2021 को वर्चुअल माध्यम में ‘दिव्यांगजन पुनर्वास पर 6 महीने का समुदाय आधारित समावेशी विकास कार्यक्रम’ [Community Based Inclusive Development (CBID) Program] लॉन्च किया।

महत्वपूर्ण तथ्य: कार्यक्रम का उद्देश्य समुदाय स्तर पर ‘जमीनी पुनर्वास कर्मियों’ (grass-root rehabilitation workers) का एक पूल बनाना है, जो आशा और आंगनवाड़ी कर्मियों के साथ दिव्यांगता से जुड़े विभिन्न विषयों का निपटान कर सकें और समाज में दिव्यांगजनों के समावेशन में मदद कर सकें।

  • कार्यक्रम इन कर्मियों के दक्षता आधारित ज्ञान और कौशल के आधार पर तैयार किया गया है ताकि वे वे अपने कर्तव्यों का सफलतापूर्वक निर्वहन करने की क्षमता को बढ़ा सकें। इन कर्मियों को ‘दिव्यांग मित्र’ कहा जाएगा।
  • ‘भारतीय पुनर्वास परिषद’ दिव्यांगजनों के अधिकारिता विभाग के 7 राष्ट्रीय संस्थानों और समुदाय आधारित पुनर्वास कार्यक्रम में अनुभव रखने वाले 7-9 स्वैच्छिक संगठनों में दो बैचों के लिए पायलट आधार पर पाठ्यक्रम शुरू करना चाहता है।
  • प्रारंभ में यह कार्यक्रम अंग्रेजी, हिंदी और 7 क्षेत्रीय भाषाओं, गुजराती, मराठी, उड़िया, बंगाली, तेलुगु, तमिल और गारो में उपलब्ध होगा।
  • इस CBID पाठ्यक्रम को दिव्यांगता के क्षेत्र में सहयोग के लिए 22 नवंबर, 2018 को ऑस्ट्रेलिया सरकार और भारत सरकार के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के तहत एक संयुक्त पहल के रूप में 'भारतीय पुनर्वास परिषद' और मेलबर्न विश्वविद्यालय' द्वारा सह-डिजाइन किया गया है।

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वयोवृद्ध तमिल लेखक 'की राजनारायणन' का निधन


वयोवृद्ध तमिल लेखक और साहित्य अकादमी विजेता ‘की राजनारायणन’ (Ki Rajanarayanan) का 17 मई, 2021 को पुडुचेरी में निधन हो गया। वे 98 वर्ष के थे।

  • 'की रा' (Ki Ra) के नाम से लोकप्रिय, राजनारायणन की पहली लघु कहानी 'मायामान' 1959 में 'सरस्वती' पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।
  • उन्हें 'करिसल साहित्य' के अग्रदूत के रूप में जाना जाता था। राजनारायण 1980 के दशक में पुडुचेरी विश्वविद्यालय में लोक-साहित्य विभाग के प्रोफेसर थे।
  • उन्हें 1991 में उनके उपन्यास 'गोपालापुरातु मक्कल' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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गोवा समुद्री संगोष्ठी 2021


  • अपने समुद्री पड़ोसियों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने की दिशा में भारतीय नौसेना ने 11- 12 मई 2021 को गोवा के नेवल वॉर कॉलेज के तत्वावधान में 'गोवा समुद्री संगोष्ठी 2021’ (GOA MARITIME SYMPOSIUM 2021) की मेजबानी की।
  • संगोष्ठी का विषय: ‘समुद्री सुरक्षा और उभरते गैर-पारंपरिक खतरे: हिन्द महासागर क्षेत्र में स्थित नौसेनाओं हेतु सक्रिय भूमिका निभाने वाले हालात’ (Maritime Security and Emerging Non-Traditional Threats: A Case for Proactive Role for IOR Navies)।
  • वर्चुअल मोड में आयोजित संगोष्ठी में तटवर्ती हिंद महासागर के 13 देशों की नौसेना प्रतिनिधियों ने ऑनलाइन भागीदारी थी।
  • कार्यक्रम में भारत, बांग्लादेश, कोमोरोस, इंडोनेशिया, मेडागास्कर, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका एवं थाईलैंड शामिल थे।
  • संगोष्ठी में उभरते साझा समुद्री खतरों से निपटने के लिए हिंद महासागर क्षेत्र की नौसेनाओं के बीच क्षमता निर्माण पर जोर दिया गया था।

संक्षिप्त खबरें सार-संक्षेप चर्चित दिवस

विश्व मधुमक्खी दिवस


20 मई

2021 का विषय/अभियान: 'बी इनगेज्ड: बिल्ड बैक बैटर फॉर बीज' (Bee engaged : build Back Better for Bees)।

महत्वपूर्ण तथ्य: इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों और धरती को स्वस्थ रखने में आवश्यक भूमिका निभाने के लिए मधुमक्खियों और अन्य परागणकों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। पहली बार यह दिवस 2018 में मनाया गया था।

यह दिवस इस तिथि को इसलिए चुना गया क्योंकि 20 मई, 1734 को आधुनिक मधुमक्खी पालन तकनीक के जनक एंटोन जान्सा का जन्म हुआ था।

राज्य समाचार पंजाब

'बसेरा' परियोजना


  • शहरी गरीबों को घर उपलब्ध कराने के प्रयास में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने 11 मई, 2021 को स्थानीय सरकारी विभाग को प्रमुख 'बसेरा' परियोजना पर काम में तेजी लाने का निर्देश दिया।
  • उद्देश्य: सितंबर 2021 तक 10,000झुग्गियों में रहने वाले परिवारों को मालिकाना हक देने का लक्ष्य हासिल करना।
  • 'बसेरा' योजना के तहत, 196 झुग्गी बस्तियों की पहचान की गई थी और 25,850 परिवारों का सर्वेक्षण किया गया था।
  • मुख्यमंत्री ने अगले चार महीनों में 10,000 परिवारों को मालिकाना अधिकार हस्तांतरित करने के काम को तत्काल पूरा करने का आह्वान किया।