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मध्य प्रदेश में आदिवासी


मध्य प्रदेश में सत्ताधारी भाजपा ने राज्य की 1.53 करोड़ आदिवासी आबादी को लुभाने के लिए बड़े पैमाने पर जनजातीय पहुंच पहल (tribal outreach) की शुरुआत की है, जो कि इसकी 7.2 करोड़ आबादी का 21.10% है।

  • 46 मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजातियों के साथ मध्य प्रदेश में देश की सबसे बड़ी आदिवासी आबादी है, जिनमें से तीन राज्य के 52 जिलों में फैले विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (Particularly Vulnerable Tribal Groups: PVTG) हैं।
  • भील समुदाय में कुल आदिवासी आबादी का लगभग 40% है, इसके बाद गोंड जनजाति है, जो राज्य की कुल आदिवासी आबादी का 34% है।
  • जनजातीय पहुंच पहल के लिए राज्य सरकार ने हाल में विभिन्न घोषणायें की है।
  • 18 सितंबर को राज्य सरकार ने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 के कार्यान्वयन की घोषणा की, जो अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए पारंपरिक ग्राम सभाओं के माध्यम से स्व-शासन की अनुमति देता है।
  • इसके अलावा आदिवासियों के मुख्य पेय 'महुआ' को वैध कर दिया गया, जिसे 'धरोहर मदिरा' के रूप में बेचा जाएगा।
  • छिंदवाड़ा में विश्वविद्यालय का नाम शंकर शाह, रघुनाथ शाह के नाम पर रखा जाएगा। सुमेर शाह के पुत्र शंकर शाह गोंड शासन के तहत गढ़ साम्राज्य के अंतिम शासक थे।
  • मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर में पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम 'टंट्या भील' (Tantya Bhil)के नाम पर रखने की घोषणा की है।