जलवायु अनुकूलन शिखर सम्मेलन - 2021


नीदरलैंड सरकार ने 25 और 26 जनवरी, 2021 को ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय जलवायु अनुकूलन शिखर सम्मेलन (CAS Online) आयोजित किया।

  • ऑनलाइन जलवायु अनुकूलन शिखर सम्मेलन का आयोजन जलवायु आपातकाल के लिए अग्रणी समाधानों और जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (United Nations Framework Convention on Climate Change-UNFCCC)के विभिन्न देशों के साथ सम्मेलन का 26वें सत्र (26th session of the Conference of the Parties- COP26) के माध्यम से ‘संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्यवाही शिखर सम्मेलन' (UN Climate Action Summit)की प्रगति बनाये रखने के लिए किया गया।

जलवायु परिवर्तन अनुकूलन क्या है?

  • जलवायु परिवर्तन अनुकूलन वास्तविक या अपेक्षित जलवायु और उसके प्रभावों के जवाब में पारिस्थितिक, सामाजिक या आर्थिक प्रणालियों में समायोजन को संदर्भित करता है। यह प्रक्रियाओं, प्रथाओं और संरचनाओं में परिवर्तन के लिए संभावित नुकसान को कम करने या जलवायु परिवर्तन से जुड़े अवसरों से लाभ प्राप्त करने के लिए संदर्भित करता है।

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शासन के तहत अनुकूलन चक्र

जलवायु परिवर्तन अनुकूलन की आवश्यकता

  • चूंकि जलवायु परिवर्तन मौसम की चरमसीमा की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि करता है, अतः एक प्रभावी प्रारंभिक चेतावनी और प्रारंभिक कार्रवाई की आवश्यकता की अनिवार्यता होती है।
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, पिछले 50 वर्षों में मौसम, जलवायु और पानी से संबंधित ख़तरों के कारण 11,000 से अधिक आपदाएं हुई हैं, जिसका कुल हर्ज़ाना तकरीबन $3.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है।
  • मौसम की पराकाष्ठा और जलवायु से संबंधित ख़तरों के चलते पिछले दशक में 410,000 से अधिक लोगों को जान गँवानी पड़ी, इनमें से बहुतायत ग़रीब और ग़रीब–मध्यम वर्ग वाले देश के नागरिक थें।
  • हालांकि वैश्विक मृत्यु दर गिरी है, इसके बावजूद ग़रीब देशों में मृत्यु दर अनुपातहीन रूप से उजागर हुआ है।
  • तीन में से एक व्यक्ति अभी भी प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों द्वारा पर्याप्त रूप से कवर नहीं किया गया है, और जोख़िम-सूचित प्रारंभिक दृष्टिकोण आवश्यक पैमाने पर उपलब्ध नहीं हैं। इन नुकसानों को कम करने में मदद करने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों द्वारा पूर्ण वैश्विक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए एक साथ काम करने की आवश्यकता है।

शिखर सम्मेलन में भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलवायु अनुकूलन शिखर सम्मेलन 2021 को संबोधित किया और जलवायु अनुकूलन की दिशा में भारत के दृष्टिकोण और प्रयासों को अभिव्यक्त किया:

  • जलवायु अनुकूलन पहले की तुलना में आज अत्यंत महत्वपूर्ण है, यह भारत के विकास के प्रयासों का एक प्रमुख तत्व है।
  • स्वच्छ ऊर्जा: भारत वर्ष 2030 तक 450 ज़ीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को लक्षित कर रहा है।
  • स्वच्छ ईंधन: भारत 80 मिलियन ग्रामीण परिवारों को खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन प्रदान कर रहा है।
  • स्वच्छ जल: भारत 64 मिलियन घरों को पाइप जलापूर्ति से जोड़ रहा है।
  • CO2उत्सर्जन में कमी: भारत एलईडी रोशनी को बढ़ावा दे रहा है और सालाना 38 मिलियन टन कार्बन डाइ ऑक्साइड उत्सर्जन को बचा रहा है।
  • पेरिस समझौता: भारत न केवल अपने पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करेगा, बल्कि उसे आगे बढ़ाएगा।
  • पर्यावरणीय विचलन का उलटा: भारत न केवल पर्यावरणीय गिरावट को गिरफ्तार करेगा बल्कि इसे उलट देगा। भारत वर्ष 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर ख़राब भूमि को पुनर्स्थापित (हरा-भरा) करने जा रहा है।
  • नई क्षमताओं का निर्माण: भारत न केवल नई क्षमताओं का निर्माण करेगा, बल्कि उन्हें वैश्विक रूप से प्रसार के लिए एक एजेंट भी बनाएगा।
  • मान्यताएं: हमारा प्राचीन ग्रंथ यजुर्वेद हमें सिखाता है कि ग्रह पृथ्वी के साथ हमारा रिश्ता एक माँ और उसके बच्चे का है। अगर हम धरती माता का ध्यान रखेंगे, तो वह हमारा पालन-पोषण करती रहेगी।
  • जीवन शैली: जलवायु परिवर्तन के अनुकूल होने के लिए, हमारी जीवनशैली को भी इसी आदर्श के साथ अनुकूल होना चाहिए। इस भावना को हमारे आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन करना चाहिए।

अनुकूलन क्रिया गठबंधन (Adaptation Action Coalition): एक नई वैश्विक जलवायु कार्रवाई गठबंधन

  • यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री बोरिस जोनसन एक नए अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन की घोषणा की है जिसका नाम अनुकूलन क्रिया गठबंधन (Adaptation Action Coalition) है। इसका गठन जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए किया गया है।
  • नीदरलैंड में आयोजित जलवायु अनुकूलन शिखर सम्मेलन, सर्व-प्रथम वैश्विक शिखर सम्मेलन है जो पूरी तरह से अनुकूलन और लचीलेपन पर केंद्रित था।
  • अनुकूलन क्रिया गठबंधन यूके द्वारा तैयार किया गया जिसमें मिस्र, बांग्लादेश, मलावी, नीदरलैंड्स, सेंट लूसिया और संयुक्त राष्ट्र के साथ साझेदारी है।
  • नए गठबंधन का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र कॉल फॉर एक्शन ऑन एडेप्टेशन एंड रेजिलिएंस (United Nations Call for Action on Adaptation and Resilience) के माध्यम से कमज़ोर समुदायों को ज़मीनी सहायता प्रदान करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को शुरू करने के लिए कार्य करना है।

भारत में तेंदुओं की स्थिति पर रिपोर्ट


केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 21 दिसंबर, 2020 को नई दिल्ली में ‘भारत में तेंदुओं की स्थिति पर रिपोर्ट’ जारी की।

महत्वपूर्ण तथ्य: रिपोर्ट के अनुसार भारत में तेंदुओं की संख्या 12,852 तक पहुंच गई है। जबकि इससे पहले 2014 में हुई गणना के अनुसार देश में 7,910 तेंदुए थे। इस अवधि में तेंदुओं की संख्या में 60 फीसदी बढ़ोतरी हुई है।

  • कैमरा ट्रैपिंग विधि का उपयोग करके तेंदुए की आबादी का अनुमान लगाया गया है।
  • गणना के अनुसार सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में 3,421 तेंदुए, कर्नाटक में 1,783 तेंदुए और महाराष्ट्र में 1,690 तेंदुए पाए गए हैं।
  • भारत में, तेंदुओं ने पिछले 120-200 वर्षों में संभवतः ‘मानव-जनित 75-90% आबादी गिरावट’ का अनुभव किया है।
  • भारतीय उपमहाद्वीप में अवैध शिकार, पर्यावास नुकसान, प्राकृतिक शिकार में कमी और संघर्ष तेंदुए की आबादी के लिए बड़े खतरे हैं।
  • इन सभी के कारण अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा प्रजाति की स्थिति को 'संकटासन्न' (Near Threatened) से 'अतिसंवेदंशील' (Vulnerable) कर दिया गया ।

क्षेत्रवार वितरण: मध्य भारत और पूर्वी घाटों में तेंदुओं की संख्या सबसे ज्यादा 8,071 है। पश्चिमी घाट क्षेत्र में 3,387 तेंदुए, जबकि शिवालिक और गंगा के मैदानों में 1,253 तथा पूर्वोत्तर पहाड़ियों में 141 तेंदुए पाए गए।