मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य देखभाल हेतु 'सुमन रोडमैप 2030'

  • 30 Jun 2026

29 जून, 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सुमन रोडमैप 2030 (SUMAN Roadmap 2030) नामक एक व्यापक एवं दूरदर्शी रणनीतिक रूपरेखा का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य देशभर में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में व्यापक सुधार लाना तथा वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति की दिशा में भारत की प्रगति को गति देना है।

मुख्य बिंदु

  • साक्ष्य-आधारित रणनीति: 'सुमन रोडमैप 2030' एक साक्ष्य-आधारित रणनीति है, जो मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप लागू करने पर बल देती है।
  • समग्र स्वास्थ्य देखभाल दृष्टिकोण: इसमें गर्भधारण-पूर्व, गर्भावस्था, प्रसव तथा प्रसवोत्तर देखभाल को एकीकृत किया गया है। साथ ही, इसे शिशु स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य, परिवार नियोजन तथा पोषण कार्यक्रमों के साथ समन्वित किया गया है।
  • हाई-रिस्क प्रेगनेंसी प्रबंधन: इस रोडमैप में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं (High-Risk Pregnancies) की समय पर पहचान, ट्रैकिंग एवं प्रभावी प्रबंधन के लिए एक व्यवस्थित तंत्र विकसित किया गया है।
  • चार प्रमुख देखभाल चरण: इसमें मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के चार महत्वपूर्ण चरणों - गर्भावस्था के दौरान देखभाल, तीसरी तिमाही की देखभाल, प्रसव के दौरान देखभाल तथा प्रसवोत्तर देखभाल, पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप सुनिश्चित हो सके।
  • संस्थागत एवं डिजिटल सुदृढ़ीकरण: प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' की स्थापना, शिकायत निवारण हेतु 'सुमन कॉल सेंटर', स्वास्थ्य संस्थानों के बीच सुदृढ़ रेफरल प्रणाली तथा 'जननी पोर्टल' के माध्यम से डिजिटल निगरानी एवं रिपोर्टिंग की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।