जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026
- 01 Aug 2026
31 जुलाई, 2026 को लोक सभा ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया। यह विधेयक जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन करने के लिए लाया गया है। इसका उद्देश्य विलंबित पंजीकरण से संबंधित प्रावधानों को अधिक कठोर बनाना तथा जन्म एवं मृत्यु की घटनाओं की समय पर सूचना देने को प्रोत्साहित करना है।
मुख्य बिंदु
- विलंबित पंजीकरण के लिए कड़े प्रावधान: यदि जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवलजिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-खण्ड मजिस्ट्रेट (SDM) अथवा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की स्वीकृति तथा घटना की प्रामाणिकता के सत्यापन के बाद ही किया जाएगा।
- दो वर्ष से अधिक विलंब पर न्यायिक अनुमति: यदि जन्म या मृत्यु की सूचना दो वर्ष से अधिक समय बाद दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) के आदेश पर ही किया जा सकेगा।
- प्रामाणिकता का सत्यापन अनिवार्य: विधेयक के अनुसार, विलंबित पंजीकरण की अनुमति देने से पूर्व संबंधित प्राधिकृत अधिकारी द्वारा जन्म अथवा मृत्यु कीप्रामाणिकता का सत्यापन करना अनिवार्य होगा।
- महत्त्व: भारत में जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण अनिवार्य है तथा इसके आधार पर जारी प्रमाण-पत्र किसी व्यक्ति की वैधानिक पहचान (Legal Identity) का महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ होता है।
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