राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना ‘समुद्र मंथन’ को मंजूरी

  • 01 Aug 2026

31 जुलाई, 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजना ‘समुद्र मंथन’–राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक के लिए 84,084 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य अपतटीय तेल एवं गैस अन्वेषण को गति देना तथा भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।

मुख्य बिंदु

  • समग्र अपतटीय विकास: इस योजना में अपतटीय अन्वेषण की संपूर्ण मूल्य शृंखला को शामिल किया गया है, जिसमें उच्च-गुणवत्ता वाले भूकंपीय आँकड़ों का संग्रहण, प्रसंस्करण एवं विश्लेषण, गहरे एवं अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में अन्वेषण ड्रिलिंग, सीमांत बेसिनों में वैज्ञानिक ड्रिलिंग, साझा अपतटीय उत्पादन एवं निकासी अवसंरचना का विकास तथा एकीकृत ऑयल एंड गैस मैन्युफैक्चरिंग एंड सर्विसेज़ ज़ोन की स्थापना शामिल है।
  • प्रौद्योगिकी एवं क्षमता निर्माण: योजना में डिजिटल कार्यक्रम प्रबंधन, क्षमता निर्माण, उन्नत प्रौद्योगिकी अपनाने, हितधारकों की सहभागिता तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।
  • अपेक्षित परिणाम: इस योजना से600 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट (MMTOE) से अधिक नए भंडार जुड़ने, घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन में वृद्धि, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन, मेक इन इंडियाएवं आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा मिलने तथा अन्वेषण एवं उत्पादन क्षेत्र में व्यापक निवेश आकर्षित होने की अपेक्षा है।
  • महत्त्व: अपस्ट्रीम क्षेत्र में किए गए हालिया सुधारों के आधार पर समुद्र मंथन भारत की अपतटीय ऊर्जा क्षमता का दोहन करने, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने तथा विश्वस्तरीय अपतटीय अवसंरचना के विकास की दिशा में एक परिवर्तनकारी पहल सिद्ध होगी।