WTO के अंतर्गत बहुपक्षीय समझौतों के लिए भारत की शर्तें
- 18 Sep 2026
16 सितंबर 2026 को भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) सुधारों पर एक प्रस्ताव रखा, जिससे बहुपक्षीय (प्लुरिलेटरल) समझौतों को WTO ढांचे में शामिल करने में सुविधा हो सकती है।
- यह प्रस्ताव मार्च 2026 में कैमरून में हुए WTO के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में बहुपक्षीय समझौतों के प्रति भारत के कड़े विरोध के बाद आया।
बहुपक्षीय (प्लुरिलेटरल) समझौते क्या हैं?
- बहुपक्षीय समझौता WTO के सभी सदस्यों के बीच नहीं, बल्कि सदस्यों के एक समूह के बीच होने वाला व्यापार समझौता होता है।
- कोई भी बहुपक्षीय समझौता WTO की आधिकारिक नियमपुस्तिका का हिस्सा तभी बन सकता है, जब सभी WTO सदस्य इस पर सहमत हों।
भारत के विरोध का कारण
- भारत की चिंता है कि ये समझौते विकासशील देशों (जिसमें भारत भी शामिल है) के हितों के खिलाफ काम करेंगे।
- कई विकसित देशों ने भारत के सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग कार्यक्रम का विरोध इस आधार पर किया है कि ये व्यापार को प्रभावित कर रहे हैं।
WTO बहुपक्षीय समझौतों के लिए भारत की शर्तें
- बाहर रहने का अधिकार: सदस्यों को बिना मौजूदा WTO अधिकारों को खोए समझौते से बाहर रहने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
- विकासशील देशों के सुरक्षा उपाय: विशेष एवं विभेदक व्यवहार (S&DT) केंद्र में बना रहना चाहिए।
- WTO के मूल कार्यों की रक्षा: संसाधनों को विकासशील देशों के लिए तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण से हटाया नहीं जाना चाहिए।
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