मृदा कार्बन क्रेडिट

  • 19 Sep 2026

17 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार ने लुधियाना में पुनर्योजी खेती पद्धतियों को अपनाने वाले किसानों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से पहली मृदा-कार्बन भुगतान राशि जारी की।

  • ये भुगतान ‘आदि’ (Aadi) किसान-कार्बन कार्यक्रम के अंतर्गत किए गए, जिसे ग्रो इंडिगो द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तकनीकी सहयोग से शुरू किया गया है।

मृदा कार्बन क्रेडिट क्या हैं?

  • मृदा कार्बन क्रेडिट वे कार्बन इकाइयाँ हैं जो ऐसी कृषि पद्धतियों से उत्पन्न होती हैं जो मिट्टी में कार्बनिक कार्बन (SOC) बढ़ाती हैं या खेती से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करती हैं।
  • हालांकि, केवल SOC में वृद्धि से क्रेडिट की संख्या तय नहीं होती। कार्बन-क्रेडिट पद्धतियाँ निम्नलिखित बातों को भी ध्यान में रखती हैं:
    • आधारभूत स्थितियाँ और परियोजना गतिविधियाँ,
    • अन्य ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में परिवर्तन,
    • अनिश्चितता और लीकेज (रिसाव),
    • कार्बन भंडारण की स्थायित्वता (परमानेंस)।

आदि किसान-कार्बन कार्यक्रम

  • परिचय: 2019 में शुरू किया गया; यह भारत का पहला किसान-केंद्रित कार्बन कार्यक्रम है।
  • उद्देश्य: पुनर्योजी और जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देना।
  • फोकस: फसल अवशेष प्रबंधन, जल संरक्षण और मिट्टी के उर्वरता में सुधार।
  • कार्बन पद्धति: वेरा VM0042 का उपयोग करती है, जो बेहतर कृषि भूमि प्रबंधन से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी और निष्कासन की मात्रा निर्धारित करने की पद्धति है।
  • महत्व: पुनर्योजी खेती, कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन और किसानों के लिए अतिरिक्त आय को बढ़ावा देकर भारत के जलवायु लक्ष्यों को पूरा करता है।