विशेष श्रेणी का दर्जा (SCS)

  • 12 Feb 2020

  • हाल ही में आंध्र प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से विशेष श्रेणी का दर्जा (SCS) प्रदान करने की मांग की है. उन्होंने पूर्ववर्तीकेंद्र सरकार द्वारा किये वादे का हवाला देते हुए यह मांग की.

पृष्ठभूमि

  • राज्य के विभाजन के दौरान केंद्र में कांग्रेस सरकार थी. तत्कालीन सरकार ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा किया था. उसका कहाना थाकि राज्य के प्रगति में मदद के लिए विशेष दर्जे को 5 साल के लिए बढाया जायेगा. इसके अतिरिक्त भारतीय जनता पार्टी ने 2014 आमचुनाव प्रचार के दौरान राज्य को विशेष दर्जा देने की बात कही थी.
  • आंध्र प्रदेश के अलावा बिहार, उड़ीसा, राजस्थान और पश्चिम बंगाल विशेष श्रेणी के दर्जे की मांग कर रहे हैं.

आंध्र प्रदेश विशेष श्रेणी के दर्जे की मांग क्यों कर रहा है?

  • प्रदेश के विशेष श्रेणी के दर्जे की मांग का मुख्य आधार ‘राजस्व के क्षेत्र में होने वाला भारी नुकशान’ है. दरअसल हैदराबाद को तेलंगाना में शामिल होने से आंध्र ने राजस्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खोया है.

आंध्र को विशेष राज्य के दर्जे की मांग को केंद्र सरकार क्यों नकार रही है?

  • फरवरी 2015 में संसद के भीतर14वां वित्त आयोगपेश किया गया. यह आयोगविशेष दर्जेके राज्यों व अन्य राज्यों के बीच के अंतर को समाप्त करता है. आयोग ने राज्यों के करों में 32% के बजाय 42% कीउच्च हिस्सेदारी की सिफारिश कीऔरजरूरत पड़ने पर आंध्र प्रदेशजैसे राज्यों के लिए ‘राजस्व घाटा अनुदान’ देने की बात की.अर्थात राज्यों के विशेष दर्जे का प्रावधान समाप्त हो चुका है तो आंध्र को देने का कोई सवाल ही नहीं रहा.
  • हाल ही में15 वें वित्त आयोग ने 2020-21 के लिए अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपी.जिसमें स्पष्ट कर दियागया है कि विशेष श्रेणी की स्थिति की मांग पूरी तरह से केंद्र सरकार के क्षेत्र के अधीन है. जो किसी भी राज्य को लेकर उचित समय में उचितमहत्वताको ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय ले सकती है.
  • हैदराबाद, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और फार्मा का केंद्रहै. इसके अलग होने से नुकसान के बावजूद2017-18 और2013-14 के बीच तेलंगाना के 8.6% की तुलना आंध्र में10% वार्षिक वृद्धि हुई है. एक वित्तीय अनुमान के अनुसार 2018-19 में राजकोषीय घाटा तेलंगाना के 3.5% की तुलना आंध्र में 2.8% हुआ.

 विशेष श्रेणी की स्थिति (Special Category Status) क्या है?

  • विशेष श्रेणी की स्थिति (SCS), केंद्र द्वारा किया गया वर्गीकरण हैजो उन राज्यों के विकास में सहायता के लिए दिया जाता हैजो भौगोलिक, सामाजिकऔर आर्थिक नुकसान का सामना कर रहे हैं. जैसे पहाड़ी इलाके वाले राज्य,अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगे हुए राज्य,आर्थिक और ढांचागत पिछड़ेपन वाले राज्य और गैर-व्यवहार्य वित्त वाले राज्य.
  • संविधान में भारत के किसी भी राज्य को विशेष श्रेणी के दर्जा (SCS) वाले राज्य के रूप में वर्गीकृत करने का कोई प्रावधान शामिल नहीं है.

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • विशेष श्रेणी की स्थिति की अवधारणा पहली बार 1969 में शुरू की गई.जब पांचवें वित्त आयोग ने कुछ वंचित राज्यों को केंद्रीय सहायता और रियायत, विशेष विकास बोर्ड की स्थापना,स्थानीय सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थाओं में आरक्षण इत्यादि प्रदान करने के लिए मांग की.
  • इस सूत्र का नाम योजना आयोग के तत्कालीन उपाध्यक्ष डॉ.गाडगिल मुखर्जी के नाम पर रखा गया है. यह केंद्र द्वारा राज्यों को विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता प्रदान करने से संबंधित है.
  • शुरूआत मेंतीन राज्यअसम, नागालैंड और जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त था. लेकिन 1974-1979 तकपाँच अन्य राज्यों को विशेष श्रेणी में जोड़ा गया. इनमें हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम और त्रिपुरा शामिल हैं.
  • 1990 मेंअरुणाचल प्रदेश और मिजोरम को मिलाकर इस सूची में 10 राज्यशामिल हो गए. उत्तराखंड राज्य को 2001 में विशेष श्रेणी का दर्जा दिया गया.
  • 2015 में योजना आयोग को समाप्त करके नीति आयोग (NITI Aayog) का गठन किया गया. जिसके बाद 14 वें वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू किया गया.

नोट: जम्मू और कश्मीर (J & K) को अनुच्छेद 370 के अनुसार एक विशेष दर्जा वविशेष श्रेणी के राज्य दर्जा भीप्राप्त था । लेकिन वर्तमान में अनुच्छेद 35A को समाप्त कर दिया गया है. यह विधायिका के साथ एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया है. जिसकी वजह से जम्मू-कश्मीरपर विशेष श्रेणी का दर्जा अब लागू नहीं होता है।

विशेष श्रेणी के दर्जे के लिए मानदंड

  • पहाड़ी और कठिन इलाका
  • भौगोलिक अलगाव
  • कम जनसंख्या घनत्व या जनजातीय आबादी का बड़ा हिस्सा
  • पड़ोसी देशों के साथ सीमाओं के साथ रणनीतिक स्थान
  • आर्थिक और ढांचागत (iinfrastructural)पिछड़ापन
  • आर्थिक और बुनियादी ढांचा में पिछड़ापन
  • राज्य वित्त की गैर-व्यवहार्य प्रकृति