मध्य प्रदेश में‘गिलेन-बैरे सिंड्रोम’ का प्रकोप

  • 19 Jan 2026

हाल ही में मध्य प्रदेश के नीमच जिले के मनासा कस्बे में गिलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) का प्रकोप देखा गया। पिछले कुछ दिनों में यहाँ इसके 18 मामले दर्ज किए गए तथा 2 बच्चों की मृत्यु हो गई।

GBS क्या है?

  • गिलेन-बैरे सिंड्रोम एक दुर्लभ ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका संबंधी) विकार है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System) पर हमला करती है।
  • GBS के सबसे सामान्य प्रकार को एक्यूट इन्फ्लेमेटरी डिमायलिनेटिंग पोलिरैडिकुलोन्यूरोपैथी (AIDP) कहा जाता है।
  • इसमें प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से मायलिन आवरण (Myelin Sheath), जो तंत्रिकाओं की सुरक्षात्मक परत है, को क्षति पहुँचाती है।
  • इससे तंत्रिका संकेतों का संचार बाधित हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप मांसपेशीय कमज़ोरी तथा पक्षाघात (Paralysis) की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

अन्य प्रमुख तथ्य

  • संक्रमण: यह सामान्यतः किसी संक्रमण (जैसे कैम्पिलोबैक्टर, वायरल बुखार) के बाद होता है।
  • व्यापकता: विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, यह वैश्विक रूप से 1-2 प्रति 1,00,000 लोगों में होता है।
  • निगरानी: भारत में ICMR के अंतर्गत राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV), पुणे जैसी एजेंसियां GBS के प्रकोप की जांच और निगरानी करती हैं, विशेषकर तब जब इसका संबंध संक्रमण (जैसे वायरल/बैक्टीरियल) से संदिग्ध हो।
  • उपचार: GBS के मानक उपचार में इंट्रावेनस इम्युनोग्लोबुलिन (IVIG) या प्लाज्मा एक्सचेंज/प्लाज्माफेरेसिस शामिल होते हैं।