भारत ने सिंधु जल संधि पर मध्यस्थता फैसला खारिज किया
- 02 Sep 2026
31 अगस्त, 2026 को भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) पर मध्यस्थता न्यायालय (Court of Arbitration) के नवीनतम फैसले को खारिज करते हुए कहा कि इस निकाय का गठन अवैध रूप से किया गया है।
मुख्य बिंदु
- भारत का रुख: भारत ने फैसले को खारिज करते हुए दोहराया कि वह मध्यस्थता न्यायालय के अधिकार-क्षेत्र को मान्यता नहीं देता है।
- अवैध गठन: भारत ने कहा कि इस निकाय का गठन विश्व बैंक द्वारा सिंधु जल संधि के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए किया गया था।
- मान्यता नहीं: भारत ने मध्यस्थता न्यायालय के कानूनी अस्तित्व को कभी मान्यता नहीं दी है।
- कार्यवाही में भागीदारी नहीं: भारत न तो इस निकाय के समक्ष उपस्थित हुआ है और न ही इसके पूर्व निर्णयों को स्वीकार किया है।
- संप्रभु निर्णय: भारत ने स्पष्ट किया कि जल परियोजनाओं से संबंधित उसके संप्रभु निर्णयों पर इस निकाय का कोई अधिकार-क्षेत्र नहीं है।
- फैसलों का प्रभाव: भारत के अनुसार, मध्यस्थता न्यायालय के वर्तमान या भविष्य के किसी भी फैसले का उसकी कार्रवाइयों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
- संधि की स्थिति: भारत ने दोहराया कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का उसका निर्णय अभी भी प्रभावी है।
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