रियल-वर्ल्ड एसेट टोकनाइजेशन

  • 21 Sep 2026

हाल ही में, महाराष्ट्र सरकार ने रियल-वर्ल्ड एसेट (RWA) टोकनाइजेशन के लिए राज्य-समर्थित कानूनी ढांचा स्थापित करने हेतु डिजिटाइजेशन एंड एक्सचेंज ऑफ लैंड टोकन एसेट्स (DELTA) अधिनियम का प्रस्ताव रखा है।

रियल-वर्ल्ड एसेट टोकनाइजेशन क्या है?

  • यह ब्लॉकचेन और डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) का उपयोग करके भौतिक परिसंपत्तियों—जैसे रियल एस्टेट, बॉन्ड और अन्य प्रतिभूतियों—में स्वामित्व या आर्थिक अधिकारों को सुरक्षित, सत्यापन योग्य डिजिटल टोकन के रूप में प्रस्तुत करने को संदर्भित करता है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • आंशिक स्वामित्व (Fractional Ownership): उच्च-मूल्य वाली परिसंपत्तियों को डिजिटल इकाइयों में विभाजित किया जा सकता है, जिससे खुदरा और संस्थागत निवेशकों के लिए बाधाएँ कम होती हैं।
  • तेज़ी से निपटान (Faster Settlement): ब्लॉकचेन लगभग तत्काल, पारदर्शी और स्वचालित लेन-देन को सक्षम बना सकता है।
  • अधिक पारदर्शिता (Greater Transparency): अपरिवर्तनीय डिजिटल रिकॉर्ड स्वामित्व सत्यापन, अनुपालन और ऑडिट क्षमता में सुधार कर सकते हैं।

RWA टोकनाइजेशन के प्रति भारत का नियामक दृष्टिकोण

  • RBI का दृष्टिकोण: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) RWA टोकनाइजेशन को विनियमित वित्तीय संस्थानों और ढाँचों के प्रतिस्थापन के रूप में नहीं, बल्कि बाजार दक्षता में सुधार के लिए एक तकनीकी परत के रूप में देखता है।
  • डीमैट 2.0: RBI और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा लॉन्च किया गया, डीमैट 2.0 कॉरपोरेट बॉन्ड के लिए DLT का उपयोग करके एक संप्रभु-समर्थित RWA टोकनाइजेशन पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करता है, जो यूनिफाइड मार्केट इंटरफेस (UMI) के माध्यम से RBI के थोक CBDC के साथ एकीकृत है।