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बुक्सा टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्वास कार्यक्रम शुरू
- 03 Oct 2026
2 अक्टूबर, 2026 को पश्चिम बंगाल के बुक्सा टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्वास कार्यक्रम के तहत पहली बाघिन छोड़ी गई। यह बुक्सा में व्यवहार्य और स्व-निर्भर बाघ आबादी पुनर्स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य तथ्य
- बाघिन का स्थानांतरण: बाघिन को बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से बुक्सा लाया गया। इसके बाद टेलीमेट्री, कैमरा ट्रैप और क्षेत्रीय निगरानी से इसकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।
- बुक्सा टाइगर रिजर्व: बुक्सा को 1983 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। यह भूटान और असम के जंगलों से जुड़े उत्तर बंगाल के महत्वपूर्ण पारिस्थितिक परिदृश्य का हिस्सा है।
- पारिस्थितिकी पुनर्बहाली: वर्ष 2018 से आवास सुधार, शिकार-आधार बढ़ाने, संरक्षण एवं वैज्ञानिक निगरानी पर कार्य किया जा रहा है। इस दौरान 800 से अधिक चीतल छोड़े गए और लगभग 380 हेक्टेयर घासभूमि बहाल की गई।
- प्राकृतिक पुनर्वास: कैमरा ट्रैप में 2021, 2023 और 2026 में बाघ दर्ज किए गए। 2023 में दर्ज एक बाघ की पहचान असम के मानस टाइगर रिजर्व के बाघ के रूप में हुई, जो प्राकृतिक आवागमन को दर्शाता है।
- चरणबद्ध कार्यक्रम: आगे बाघों का पुनर्वास आवास, शिकार-आधार, संरक्षण व्यवस्था, आबादी की व्यवहार्यता और निगरानी के परिणामों के आधार पर चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
- सामुदायिक भागीदारी: कार्यक्रम में 64 ईको-डेवलपमेंट समितियों/संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को जोड़ा गया है, जिसमें आजीविका, मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण और संरक्षण-आधारित लाभों पर जोर है।


