विदेशी मुद्रा भंडार में तीव्र गिरावट

  • 10 Jan 2026

9 जनवरी, 2026 को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 2 जनवरी, 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) 9.809 बिलियन डॉलर की बड़ी गिरावट के साथ 686.801 बिलियन डॉलर हो गया है। यह गिरावट पिछले एक साल में सबसे तीव्र साप्ताहिक गिरावट है।

घटकवार गिरावट

  • विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA): यह भंडार का सबसे बड़ा घटक है। इसमें 7.622 बिलियन डॉलर की कमी आई, जिससे यह 551.99 बिलियन डॉलर पर आ गया।
  • स्वर्ण भंडार (Gold Reserves): सोने के भंडार का मूल्य भी 2.058 बिलियन डॉलर घटकर 111.262 बिलियन डॉलर रह गया।
  • अन्य घटक: विशेष आहरण अधिकार (SDRs) 25 मिलियन डॉलर कम होकर 18.778 बिलियन डॉलर और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ भारत की आरक्षित स्थिति 105 मिलियन डॉलर घटकर 4.771 बिलियन डॉलर हो गई।

गिरावट के कारण

  • रुपये का बचाव: डॉलर की निरंतर मांग और पूंजी के बहिर्वाह (capital outflows) के बीच रुपये की अस्थिरता को रोकने के लिए RBI ने बाजार में डॉलर की बिक्री की, जिससे भंडार कम हुआ।
  • मूल्यांकन में हानि (Valuation Loss): अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और सोने की कीमतों में गिरावट के कारण भी भंडार के मूल्य में कमी आई।
  • पूंजी का बहिर्वाह: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजारों से पैसा निकाला है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा।

विदेशी मुद्रा भंडार क्यों महत्वपूर्ण हैं?

  • सुरक्षा कवच की भूमिका : विदेशी मुद्रा भंडार प्रतिकूल परिस्थितियों (तेल की ऊँची कीमतें, मुद्रा उतार-चढ़ाव, वैश्विक अस्थिरता) में देश को सहारा देते हैं।
  • आर्थिक स्थिरता का संकेतक: ये भंडार दर्शाते हैं कि राष्ट्र अपनी आयात आवश्यकताओं को पूरा करने और मुद्रा की हलचल को कम करने में कितना सक्षम है।