शक्सगाम घाटी पर चीन-पाक समझौता अमान्य: भारत
- 10 Jan 2026
9 जनवरी, 2026 को भारत ने स्पष्ट किया कि शक्सगाम घाटी लद्दाख का हिस्सा है और वहाँ से गुजरने वाले किसी भी बुनियादी ढाँचे या समझौते को वह अस्वीकार करता है।
- विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारत ने कभी भी 1963 के “कथित” चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते या चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को मान्यता नहीं दी है।
मुख्य तथ्य
- भारत का दावा: भारत सरकार ने शक्सगाम घाटी में चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत किए जा रहे चीन के बुनियादी ढाँचे के निर्माण का कड़ा विरोध किया। भारत ने इसे “अवैध और अमान्य” बताते हुए स्पष्ट किया कि शक्सगाम घाटी भारत का “अखंड और अविभाज्य हिस्सा” है।
- 1963 समझौता अस्वीकार: चीन-पाकिस्तान सीमा समझौता अवैध और अमान्य है तथा पाकिस्तान के पास भारत के स्वामित्व वाले क्षेत्र को चीन को सौंपने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था। भारत ने कई बार चीन को इसकी आपत्ति दर्ज कराई है।
- CPEC का विरोध: चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का हिस्सा भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरता है जो पाकिस्तानी कब्जे में है, इसलिए इसे अस्वीकार्य माना जाता है।
शक्सगाम घाटी
- विवाद: शक्सगाम घाटी (लगभग 5,200 वर्ग किमी.) कराकोरम पर्वतमाला के उत्तर में स्थित क्षेत्र है, जिसे 1963 में पाकिस्तान ने चीन को सौंप दिया था, जबकि यह जम्मू-कश्मीर/लद्दाख का हिस्सा है।
- CPEC का गिलगित-बाल्टिस्तान से ग्वादर तक का मार्ग इसी विवादित क्षेत्र से होकर गुजरता है।
- रणनीतिक महत्व: शक्सगाम घाटी सियाचिन हिमनद के उत्तर में स्थित कश्मीर क्षेत्र का हिस्सा है, जो कराकोरम पर्वतमाला के पास है।
- नीति निरंतरता: भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने क्षेत्रीय दावों को दर्ज करता रहता है, ताकि विवादित व्यवस्थाओं को तृतीय पक्ष से वैधता न मिले।
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