यूजीसी के नए विनियम पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
- 30 Jan 2026
29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में हुए विरोध-प्रदर्शनों और कानूनी चुनौतियों के मद्देनज़र ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता का संवर्धन) विनियम, 2026’ के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।
मुख्य बिंदु
- न्यायालय का आदेश और अंतरिम राहत: पीठ ने निर्देश दिया कि 2026 के विनियम फिलहाल स्थगित रहेंगे और आगामी आदेश तक 2012 के UGC विनियम प्रभावी बने रहेंगे।
- सरकार को नोटिस: न्यायालय ने केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को नोटिस जारी कर नए ढाँचे के विरुद्ध उठाई गई आपत्तियों पर जवाब मांगा।
- चुनौती के आधार: याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ये विनियम मनमाने, बहिष्कारी और भेदभावपूर्ण हैं तथा संविधान और यूजीसी अधिनियम, 1956 का उल्लंघन करते हैं।
- अनुच्छेद 142 का प्रयोग: संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त असाधारण शक्तियों का उपयोग करते हुए न्यायालय ने “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने के लिए इन विनियमों पर रोक लगाई।
- न्यायिक चिंताएं: पीठ ने चेतावनी दी कि हस्तक्षेप न करने की स्थिति में इसके समाज पर गंभीर और दूरगामी दुष्परिणाम हो सकते हैं, क्योंकि ये विनियम समाज में विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं।
- परिभाषा में अस्पष्टता: न्यायालय ने इस विनियम की धारा 3(c) पर चिंता व्यक्त की, जो जाति-आधारित भेदभाव को परिभाषित करता है, और कहा कि इसकी अस्पष्ट भाषा दुरुपयोग की आशंका पैदा करती है तथा इसमें संशोधन आवश्यक है।
- सामान्य श्रेणी का अपवर्जन: याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि विनियम केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को ही संरक्षण देते हैं, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों को बाहर कर देते हैं।
- शिकायत निवारण से वंचित किए जाने का आरोप: यह भी कहा गया कि सामान्य श्रेणी के छात्रों को इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर्स, इक्विटी हेल्पलाइन, जांच समितियों और लोकपाल जैसी शिकायत निवारण व्यवस्थाओं तक पहुंच नहीं दी गई है।
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