ISRO का “मिशन मित्रा”
- 06 Apr 2026
अप्रैल 2026 में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने लद्दाख में ‘मिशन मित्रा’ की घोषणा की। इसका उद्देश्य अत्यधिक ऊंचाई वाली कठिन परिस्थितियों में अंतरिक्ष यात्रियों के शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और परिचालन प्रदर्शन (Operational performance) का गहराई से अध्ययन करना है।
मुख्य बिंदु:
- मिशन का उद्देश्य: तनाव की स्थिति में चालक दल (Crew) के प्रदर्शन और मानवीय कारकों का अध्ययन करना; तथा चरम पर्यावरण में निर्णय लेने की क्षमता और टीम समन्वय में सुधार करना।
- मिशन मित्रा के बारे में:
- पूर्ण रूप: मैपिंग ऑफ इंटरऑपरेबल ट्रेट्स एंड रिस्पांस असेसमेंट (Mapping of Interoperable Traits and Response Assessment)।
- यह लेह में लगभग 3,500 मीटर की ऊंचाई पर संचालित किया जा रहा है।
- यह हाइपोक्सिया (ऑक्सीजन की कमी), अत्यधिक ठंड और अलगाव (Isolation) जैसी ‘अंतरिक्ष के समान’ परिस्थितियों की यथार्थवादी नकल करता है।
- अंतरिक्ष मिशनों के लिए प्रासंगिकता: यह ‘गगनयान’ कार्यक्रम का समर्थन करता है और भविष्य के लंबी अवधि के मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए बेहद उपयोगी है।
- प्रमुख फोकस क्षेत्र:
- चालक दल और ग्राउंड टीम के बीच आपसी तालमेल (Interoperability)।
- मनोवैज्ञानिक लचीलापन (Resilience) और तनाव के प्रति अनुकूलन क्षमता।
- भारी दबाव के बीच संचार और सही निर्णय लेने की क्षमता।
- सहयोगी एजेंसियां: इसरो और ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन’। इस सुविधा का प्रबंधन बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप ‘प्रोटोप्लैनेट’ द्वारा किया जा रहा है।
- कार्यप्रणाली: यह एक नियंत्रित लेकिन वास्तविक प्रतीत होने वाले वातावरण में किया जाने वाला ‘एनालॉग मिशन’ है, जहाँ पर्यावरणीय और परिचालन तनाव के तहत मानव क्षमता को परखा जाएगा।
- महत्व: यह अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और मिशन की सफलता की दर को बढ़ाता है; मानव अंतरिक्ष उड़ान में भारत की क्षमताओं को मज़बूत करता है; और भविष्य की ‘डीप-स्पेस’ (गहरे अंतरिक्ष) खोजों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करता है।
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