हरित विनिर्माण हेतु प्रकाश-संचालित नैनो-उत्प्रेरक विकसित

  • 01 Jun 2026

मई 2026 में इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST), मोहाली के शोधकर्ताओं ने एक प्रकाश-संचालित (Light-Driven) नैनो-उत्प्रेरक विकसित किया है, जो दवाओं तथा औद्योगिक रसायनों के उत्पादन को अधिक स्वच्छ, पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल बनाने में सहायक होगा। यह तकनीक विषैले विलायकों और उच्च तापमान वाली प्रक्रियाओं पर निर्भरता को कम करती है।

मुख्य बिंदु

  • नया नवाचार: वैज्ञानिकों ने स्वर्ण नैनोकणों, पैलेडियम (Palladium) नैनोकणों तथा बॉडिपाई (BODIPY: Boron-Dipyrromethene) नामक प्रकाश-संवेदी अणु को संयोजित कर एक संकर (Hybrid) नैनो-उत्प्रेरक विकसित किया है।
  • कार्यप्रणाली: स्वर्ण नैनोकण प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करते हैं। यह ऊर्जा पहले बॉडिपाई अणु को तथा उसके बाद उत्प्रेरण की सक्रिय इकाई पैलेडियम को हस्तांतरित होती है।
  • अधिक दक्षता: स्वर्ण, बॉडिपाई और पैलेडियम के संयुक्त प्रभाव से यह उत्प्रेरण प्रक्रिया पारंपरिक उत्प्रेरक प्रणालियों की तुलना में अधिक प्रभावी एवं दक्ष बन जाती है।
  • हरित रसायन विज्ञान की दिशा में कदम: यह उत्प्रेरक ऊष्मा-आधारित ऊर्जा-गहन प्रक्रियाओं के स्थान पर प्रकाश ऊर्जा का उपयोग करते हुए सामान्य परिस्थितियों में रासायनिक अभिक्रियाओं को संभव बनाता है।
  • प्रदूषण में कमी: इस तकनीक के माध्यम से विलायक के रूप में जल का उपयोग किया जा सकता है, जिससे खतरनाक एवं विषैले रसायनों पर निर्भरता घटती है।
  • औद्योगिक उपयोगिता: इस नवाचार का उपयोग औषधियों (Pharmaceuticals) तथा विभिन्न औद्योगिक रसायनों के निर्माण में किया जा सकता है, जिससे विनिर्माण प्रक्रियाएं अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बन सकेंगी।