विश्व के महासागरों में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी जीन की उपस्थिति चिंता का विषय क्यों है?

  • 09 Jun 2026

जून 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी जीन (ARGs) विश्व के प्रमुख महासागरों में व्यापक रूप से मौजूद हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि हमारे महासागर जमीनी प्रदूषण के वैश्विक भंडार बनते जा रहे हैं, जिससे एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी जीनों का प्रसार बढ़ सकता है और भविष्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।

वैश्विक उपस्थिति

  • एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी जीन (ARGs) की पहचान भूमध्य सागर, अटलांटिक महासागर, आर्कटिक महासागर सहित अनेक प्रमुख समुद्री क्षेत्रों में की गई।
  • ये जीन दूरस्थ समुद्री क्षेत्रों में भी पाए गए, जहां प्रत्यक्ष मानवीय गतिविधियां सीमित हैं।

अधिक सांद्रता वाले क्षेत्र

  • प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों के आसपास।
  • घनी आबादी वाले तटीय क्षेत्रों में।
  • शहरी अपशिष्ट एवं प्रदूषित जल के निर्वहन से प्रभावित क्षेत्रों में।

महासागरों की भूमिका

  • महासागर स्थल-आधारित प्रदूषकों के लिए एक वैश्विक अवशोषक (Global Sink) के रूप में कार्य करते हैं।
  • वे एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी जीनों को उनके मूल स्रोतों से दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचाने में सक्षम हैं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंता

  • इन जीनों का प्रसार समुद्री जीवों एवं पारितंत्रों के माध्यम से नए क्षेत्रों तक हो सकता है।
  • इससे मानव समुदायों में एंटीबायोटिक प्रतिरोध के फैलने का जोखिम बढ़ सकता है, जिससे संक्रमणों के उपचार में कठिनाई उत्पन्न हो सकती है।

अन्य प्रमुख निष्कर्ष

  • अध्ययन में माइक्रोप्लास्टिक्स की उपस्थिति भी दर्ज की गई।
  • फॉरएवर केमिकल्स (PFAS) जैसे दीर्घकालिक रसायनों की पहचान हुई।
  • SARS-CoV-2 के आनुवंशिक पदार्थ के अंश भी समुद्री नमूनों में पाए गए।

निष्कर्ष

यह अध्ययन संकेत देता है कि एंटीबायोटिक प्रतिरोध अब केवल स्थलीय पर्यावरण तक सीमित समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह समुद्री पारितंत्रों तक फैलकर एक वैश्विक पर्यावरणीय एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती का रूप ले रहा है।